पूजा-पाठ में क्यों खास हैं ये 5 चावल? जानिए धार्मिक उपयोग और खासियत

पूजा-पाठ में क्यों खास हैं ये 5 चावल? जानिए धार्मिक उपयोग और खासियत

भारत में चावल का उपयोग सिर्फ भोजन ही नहीं बल्कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस लेख में गोविंद भोग, अंबेमोहर, विष्णु भोग, काला चावल और कालानमक जैसे पांच खास चावलों के बारे में बताया गया है, जिन्हें प्रसाद और धार्मिक कार्यों में विशेष महत्व दिया जाता है.

एक हजार टन काला नमक चावल एक्सपोर्ट होगा. एक हजार टन काला नमक चावल एक्सपोर्ट होगा.
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 26, 2026,
  • Updated Jun 26, 2026, 2:35 PM IST

भारत में चावल का इस्तेमाल केवल खाने में नहीं बल्कि पूजा-पाठ, अनुष्ठान और प्रसाद में भी किया जाता है. हिंदू रीति-रिवाज में अक्षत चढ़ाने की बड़ी मान्यता है और इसके बिना पूजा-विधि को अधूरा माना जाता है. अक्षत के रूप में उसी चावल के दाने को देवी-देवता को चढ़ा सकते हैं जो अखंडित हो, यानी टूटा न हो. इसके अलावा, चावल से बने तरह-तरह के प्रसाद देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं. इस काम में खास तरह के चावल का प्रयोग होता है. आइए उन पांच चावल के बारे में जानते हैं जिन्हें पूजा-पाठ और धार्मिक विधियों में प्रयोग में लिया जाता है.

गोविंद भोग (Gobindobhog)

पश्चिम बंगाल का यह छोटा और सुगंधित चावल भगवान कृष्ण को भोग लगाने (विशेषकर जन्माष्टमी पर खीर और प्रसाद के लिए) के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इसके दाने छोटे होते हैं और स्वाद मखमली. बनाने पर इससे भीनी भीनी महक आती है और इसके भोग, खीर, खिचड़ी बनाने में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है.

अंबेमोहर (Ambemohar)

महाराष्ट्र में उगाया जाने वाला यह चावल अपने आम के फूलों जैसी महक के लिए जाना जाता है. इसे मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और नैवेद्य के लिए उपयोग किया जाता है. नाम में अंबे और मोहर लगा है जहां अंबे का अर्थ आम और मोहर यानी फूल है. यह चावल सुगंधित और छोटे दाने वाला है जिसे सुपाच्य की श्रेणी में रखा गया है. इसे खीर और सूप बनाने में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है.

विष्णु भोग चावल (Vishnu Bhog)

एक पारंपरिक और उच्च क्वालिटी वाला सुगंधित चावल है, जिसके दाने छोटे से मध्यम आकार के होते हैं. इसकी खेती मुख्यतः मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों में की जाती है. इस चावल की खासियत इसका हल्का मीठा और नटी (अखरोट जैसा) स्वाद है, जिसके कारण यह त्योहारों और धार्मिक प्रसाद में विशेष रूप से पसंद किया जाता है.

काला चावल (Black Rice/Chak-Hao)

पूर्वोत्तर भारत (विशेषकर मणिपुर) में पाए जाने वाले इस चावल को 'निषिद्ध चावल' भी कहा जाता है. इसका जामुनी रंग और औषधीय गुण इसे त्योहारों और शुभ कार्यों में विशेष बनाते हैं.

कालानमक (Kalanamak) 

उत्तर प्रदेश के हिमालय की तराई में उगाया जाने वाला यह प्राचीन चावल  भगवान बुद्ध से जुड़ा माना जाता है. इसे अपने खास तरह के स्वाद और सुगंध के कारण 'बुद्ध का महाप्रसाद' भी कहा जाता है.

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