बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पूर्वजों की जमीन का दाखिल-खारिज अब बिना आवेदन होगा

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पूर्वजों की जमीन का दाखिल-खारिज अब बिना आवेदन होगा

बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला लिया है. अब मृत जमाबंदी रैयतों की जमीन का दाखिल-खारिज उनके उत्तराधिकारियों के नाम पर कराने के लिए आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी. राजस्व कर्मचारी गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और स्वतः संज्ञान लेकर नामांतरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे. पूरी कार्रवाई बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी. सरकार ने अधिकारियों को अभियान मोड में काम करने और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

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बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पूर्वजों की जमीन का दाखिल-खारिज अब बिना आवेदन होगाबिहार में भूमि सुधार अभियान तेज

बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में एक बड़ा फैसला लिया है. अब पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन का दाखिल-खारिज उनके उत्तराधिकारियों के नाम पर कराने की प्रक्रिया सरकार खुद शुरू करेगी. इसके लिए लोगों को किसी प्रकार का आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, अब मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए वर्षों तक आवेदन देने या सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. राजस्व कर्मचारी खुद गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू कराएंगे.

बता दें कि इसको लेकर विभाग के सचिव  जय सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए है. वहीं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े. अब सरकार खुद पहल कर ऐसे मामलों का निपटारा कराएगी.

हर महीने पांच मृत जमाबंदी धारकों का सुधार अनिवार्य 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने अधीन प्रत्येक मौजा में हर माह कम-से-कम पांच मृत जमाबंदी धारकों की जमाबंदी अपडेट करना अनिवार्य होगा. यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के सभी मृत जमाबंदी मामलों का निपटारा नहीं हो जाता. इस लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल अधिकारी की होगी.

बंटवारे से संबंधित कागजात की नहीं जरूरत 

मंत्री डॉ दिलीप कुमार  जायसवाल ने बताया कि  राजस्व कर्मचारी जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे. आवश्यक जांच के बाद उत्तराधिकारियों से संपर्क कर दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे. यदि निर्धारित समय में बंटवारे से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी. पूरी प्रक्रिया बिहारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से संपन्न होगी.

युद्धस्तर पर किया जाएगा काम

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूचना आधारित उत्तराधिकार दाखिल-खारिज मामलों की नियमित निगरानी की जाए. अंचल अधिकारी प्रत्येक माह लक्ष्य तय करेंगे, जबकि अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता हर माह के प्रथम सप्ताह में अंचलवार समीक्षा करेंगे. सरकार इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है. किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

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