
देश में चाय की नीलामी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. हालांकि, सभी नीलामी केंद्रों और उद्योग से जुड़े लोगों के अनुरोध पर टी बोर्ड ने नई वेब-आधारित चाय नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत फिलहाल टाल दी है. यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि सभी संबंधित पक्षों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके. पहले यह नया प्लेटफॉर्म 30 जून से कोलकाता और 2 जुलाई से कुन्नूर नीलामी केंद्र में शुरू होने वाला था. लेकिन टी बोर्ड के उपाध्यक्ष और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद इसकी नई तारीख तय की गई है.
टी बोर्ड की ओर से जारी व्यापार सलाह के अनुसार, नई वेब-आधारित नीलामी प्रक्रिया अब 14 और 15 जुलाई को कोलकाता में होने वाली नीलामी-29 से शुरू होगी. इसके बाद 16 और 17 जुलाई को कुन्नूर नीलामी केंद्र में भी इसे लागू किया जाएगा. वहीं, देश के अन्य सभी नीलामी केंद्र 20 से 24 जुलाई के बीच होने वाली नीलामी-30 के दौरान इस नई प्रणाली से जुड़ जाएंगे.
टी बोर्ड ने बताया कि बदलाव को आसान बनाने के लिए फिलहाल दोनों प्लेटफॉर्म एक साथ चलाए जाएंगे. अगले आदेश तक सभी बिक्री के लिए कैटलॉग अपलोडिंग मौजूदा NSEIT पोर्टल और नए TradeForge प्लेटफॉर्म दोनों पर की जाएगी. इससे नीलामी प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी. बोर्ड ने सभी खरीदारों, विक्रेताओं और अन्य हितधारकों से नई सिस्टम को सफल बनाने के लिए पूरा सहयोग देने की अपील की है.
नई नीलामी प्रक्रिया को कोलकाता की TradeForge Technologies Pvt. Ltd. ने Build, Own and Operate (BOO) मॉडल के तहत तैयार किया है. यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह वेब-आधारित होगा, जबकि मौजूदा NSEIT प्रणाली एप्लीकेशन आधारित है. टी बोर्ड का कहना है कि नई प्रणाली में उपयोगकर्ताओं को अधिक आसान इंटरफेस, बेहतर सुरक्षा और कम लागत जैसी सुविधाएं मिलेंगी. साथ ही मौजूदा नीलामी प्रक्रिया और कार्य प्रणाली में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा.
नीलगिरी बॉट लीफ टी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजयन कृष्णमूर्ति ने कहा कि नई वेब-आधारित नीलामी प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनेगी. इससे चाय उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से देश की चाय नीलामी व्यवस्था और अधिक आधुनिक होगी, जिससे खरीदारों और चाय उत्पादकों दोनों को लंबे समय में लाभ मिलेगा.