
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के आमों की विदेशी बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है. पिछले एक सप्ताह के दौरान यहां से 10 टन प्रीमियम गुणवत्ता के आम विभिन्न देशों को निर्यात किए गए हैं. अधिकारियों का अनुमान है कि अगले एक महीने में यह आंकड़ा 100 टन से अधिक तक पहुंच सकता है. इससे जिले के आम उत्पादकों को बेहतर बाजार और अधिक कीमत मिलने की उम्मीद है. आईसीएआर-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) के कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा के प्रमुख डॉ. दुष्यंत राघव ने बताया कि अब तक करीब 7 टन आम पश्चिम एशिया के देशों और 3 टन आम इटली के मिलान शहर भेजे जा चुके हैं. फिलहाल 'आम्रपाली' किस्म के आमों का निर्यात किया गया है. आने वाले दिनों में 'वृंदावनी', 'फजली' और 'अश्विना' किस्मों की भी बड़ी खेप विदेश भेजने की तैयारी है.
मालदा का गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस (GAP) आधारित आम क्लस्टर लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसमें करीब 200 किसान शामिल हैं. कृषि विज्ञान केंद्र की टीम फूल आने के चरण से लेकर तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और गुणवत्ता जांच तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखना है.
अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक बाग प्रबंधन तकनीकों को अपनाने से निर्यात में तेजी आई है. इसमें समय पर फलों की बैगिंग, कीट एवं रोग प्रबंधन, संतुलित पोषण, बागों की स्वच्छता और कटाई के पहले व बाद की बेहतर हैंडलिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. इन उपायों की वजह से विदेशी खरीदारों की गुणवत्ता संबंधी शर्तों को पूरा करना आसान हुआ है.
डॉ. दुष्यंत राघव ने बताया कि निर्यात बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में भी किसानों को आम की बेहतर कीमत मिलने लगी है. आम निर्यातक प्रसून चितलंगिया ने बताया कि जून के अंतिम सप्ताह से उनके दो बागों के आम भी निर्यात खेप में शामिल किए गए हैं. जिला उद्यानिकी विभाग का भी मानना है कि अगले महीने निर्यात की मात्रा मौजूदा स्तर से काफी अधिक रहने वाली है.
मालदा से आम निर्यात की पूरी प्रक्रिया में आईसीएआर-सीआईएसएच कृषि विज्ञान केंद्र, जिला प्रशासन, एपीडा, जिला उद्यानिकी कार्यालय और मालदा मैंगो मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मिलकर काम किया है.
इन संस्थाओं ने गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और विदेशी बाजारों से संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इससे किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान हुई है और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में नई संभावनाएं बनी हैं.
इस सीजन मालदा की प्रसिद्ध 'हिमसागर' और 'लंगड़ा' किस्मों का निर्यात नहीं हो सका. अधिकारियों के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इन किस्मों के फल निर्यात के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर पाए. इसलिए इस बार निर्यात मुख्य रूप से अन्य प्रीमियम किस्मों तक सीमित रहा. (पीटीआई)