
हरियाणा सरकार ने किसानों और आम नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) की 10 सेवाओं को हरियाणा राइट टू सर्विस व्यवस्था के दायरे में शामिल कर दिया है. इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से अधिसूचना जारी की गई है. नई व्यवस्था के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए तय समय सीमा निर्धारित कर दी गई है.
अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), डुप्लीकेट आवंटन और पुनः आवंटन, कन्वेयन्स डीड जारी करना, बिक्री के बाद संपत्ति का पुनः हस्तांतरण और कृषि कार्यों के दौरान चोट या मृत्यु की स्थिति में विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद अनुग्रह सहायता देने जैसी सेवाएं अब 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी.
बेबाकी प्रमाण-पत्र (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) और बंधक (मॉर्गेज) के लिए एनओसी जारी करने की समय सीमा 15 दिन तय की गई है. वहीं, निर्विवाद मृत्यु के मामलों में संपत्ति का पुनः हस्तांतरण और कृषि कार्यों के दौरान चोट या मृत्यु पर अनुग्रह सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी.
किसानों की सुविधा को देखते हुए जे-फॉर्म (बिक्री की रसीद) जारी करने के लिए केवल एक दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है. इसके अलावा मंडियों में सार्वजनिक शौचालयों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम दो दिन का समय तय किया गया है. राज्य सरकार का उद्देश्य मंडी सेवाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है.
अधिसूचना के अनुसार, अधिकांश सेवाओं के लिए संबंधित सचिव और कार्यकारी अधिकारी को नामित अधिकारी बनाया गया है. जे-फॉर्म जारी करने की जिम्मेदारी मंडी सुपरवाइजर या सहायक सचिव को सौंपी गई है.
वहीं, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए मंडी समिति सचिव जिम्मेदार होंगे. सभी सेवाओं के लिए जिला विपणन प्रवर्तन अधिकारी को प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी और क्षेत्रीय विपणन प्रवर्तन अधिकारी को द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी नियुक्त किया गया है.