
देश में लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 के लिए घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति (रिलीज कोटा) पिछले साल के बराबर रखने का फैसला किया है. सरकार का यह कदम इस बात का संकेत है कि फिलहाल उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है, ताकि आम लोगों को कीमतों में और ज्यादा बढ़ोतरी का सामना न करना पड़े. वहीं, उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद अगले सीजन में चीनी निर्यात (एक्सपोर्ट) की संभावना भी काफी कम हो गई है.
खाद्य मंत्रालय ने जुलाई 2026 के लिए चीनी मिलों को घरेलू बाजार में 22 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति दी है. यह मात्रा पिछले साल जुलाई में जारी किए गए कोटे के बराबर है.
हालांकि, अगर पूरे चीनी सीजन (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) की बात करें तो अब तक सरकार ने कुल 223 लाख टन चीनी घरेलू बाजार के लिए जारी की है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 229.5 लाख टन था. यानी इस बार लगभग 3 प्रतिशत कम चीनी बाजार में जारी की गई है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस चीनी सीजन के पहले 10 महीनों में से सात महीनों में सरकार ने पिछले साल की तुलना में कम चीनी का कोटा जारी किया. केवल तीन महीनों में ही कोटा पिछले साल के बराबर रखा गया.
इससे साफ है कि सरकार पिछले कुछ महीनों से बाजार में चीनी की आपूर्ति को नियंत्रित तरीके से जारी कर रही है, ताकि स्टॉक बना रहे और जरूरत के समय किसी तरह की कमी न हो.
भारत में कुल चीनी उत्पादन का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से आता है. इसलिए इन राज्यों को मिलने वाला कोटा पूरे बाजार पर बड़ा असर डालता है.
पिछले कुछ महीनों में देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है. दिल्ली-एनसीआर में खुदरा बाजार में चीनी का दाम कुछ महीने पहले जहां करीब 46 रुपये प्रति किलो था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक पूरे देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 47 रुपये प्रति किलो रही, जबकि 30 सितंबर 2025 को यह 46.54 रुपये प्रति किलो थी.
थोक बाजार में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सितंबर 2025 में जहां चीनी का औसत थोक भाव 4,317.63 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं जून 2026 के अंत तक यह बढ़कर 4,363.68 रुपये प्रति क्विंटल हो गया.
देश में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने 13 मई 2026 को अचानक चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक रोक लगा दी थी.
इससे पहले सरकार ने 2025-26 चीनी सीजन में 15.9 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी. मार्च 2026 तक लगभग 6 लाख टन चीनी विदेश भेजी जा चुकी थी. उद्योग के अनुमान के मुताबिक बाद में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 8 लाख टन तक पहुंच गया.
सरकार का मानना है कि यदि बड़ी मात्रा में चीनी विदेश भेजी गई तो देश में इसकी उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसलिए घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्यात पर रोक लगाने का फैसला लिया गया.
चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के लिए पिछले साल के बराबर कोटा जारी करना इस बात का संकेत है कि सरकार फिलहाल निर्यात को बढ़ावा देने के मूड में नहीं है.
जानकारों के मुताबिक इस साल गन्ने के रकबे में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है. साथ ही अल-नीनो (El Niño) के असर से बारिश और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है. ऐसे में सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती.
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि सबसे पहले देश के लोगों के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके बाद एथेनॉल बनाने के लिए चीनी की जरूरत पूरी की जाएगी. इन दोनों जरूरतों के बाद यदि चीनी बचती है, तभी निर्यात पर विचार किया जाएगा. इसी वजह से माना जा रहा है कि 2026-27 चीनी सीजन में निर्यात की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है.
उद्योग के अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में एथेनॉल के लिए अलग की गई चीनी को छोड़कर भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 280 लाख टन रहने का अनुमान है.
यह मात्रा देश की सालाना घरेलू खपत के लगभग बराबर है. पिछले सीजन में भारत का उत्पादन 261 लाख टन रहा था, इसलिए इस बार उत्पादन में कुछ सुधार जरूर हुआ है. हालांकि उद्योग को उम्मीद थी कि इस बार उत्पादन 300 लाख टन से अधिक होगा, लेकिन मौजूदा अनुमान उससे काफी कम है.
मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार का पूरा ध्यान इस समय घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर है. बढ़ती कीमतों, सीमित उत्पादन और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण सरकार बेहद सावधानी से चीनी का कोटा तय कर रही है. आने वाले महीनों में यदि उत्पादन और मौसम की स्थिति सामान्य रहती है, तभी निर्यात जैसे फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है. फिलहाल सरकार की प्राथमिकता साफ है- देश में चीनी की कमी न हो और आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके.
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