
देश को आजाद हुए 70 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन राजस्थान के अलवर जिले का सादन का बास गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. गांव की मुख्य सड़क पूरी तरह टूट चुकी है और बरसात के दिनों में उस पर हमेशा पानी और कीचड़ भरा रहता है. इस कारण गांव के लोगों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है. सबसे दुखद बात यह है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम यात्रा निकालना भी आसान नहीं होता. कई बार लोगों को गंदे पानी से होकर श्मशान घाट तक जाना पड़ता है और बारिश होने पर तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है.
वर्षों से खराब सड़क की परेशानी झेल रहे ग्रामीणों का सब्र आखिरकार मंगलवार को टूट गया. सैकड़ों ग्रामीण और महिलाएं रामगढ़ उपखंड कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया. उस समय एसडीएम कार्यालय में मौजूद नहीं थे, इसलिए ग्रामीणों ने कार्यालय प्रतिनिधि जीतू सैनी को ज्ञापन सौंपा. ग्रामीणों ने मांग की कि गांव की मुख्य सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए और सड़क निर्माण में हुई संभावित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच भी की जाए.
ग्रामीण हनीफ खान ने बताया कि गांव से मुख्य सड़क तक जाने वाला करीब एक किलोमीटर लंबा रास्ता पूरी तरह जर्जर हो चुका है. बारिश शुरू होते ही सड़क कीचड़ और पानी से भर जाती है. ऐसे में लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार दोपहिया वाहन फिसल जाते हैं, जिससे लोग घायल हो चुके हैं. सड़क की खराब हालत के कारण गांव के लोगों को हर दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, किसानों और बीमार लोगों पर पड़ता है. बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है, जबकि मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाना भी मुश्किल हो जाता है. किसानों को अपनी फसल और खेती से जुड़े सामान लाने-ले जाने में भी दिक्कत होती है. बरसात के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है.
ग्रामीणों ने बताया कि गांव का श्मशान घाट इसी खराब सड़क के रास्ते पर स्थित है. जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो अंतिम यात्रा निकालना भी कठिन हो जाता है. बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने के कारण लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है. यदि अंतिम संस्कार के समय बारिश शुरू हो जाए तो मजबूरी में तिरपाल या टेंट लगाकर दाह संस्कार करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क की समस्या नहीं, बल्कि उनके सम्मान और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए पहले बजट स्वीकृत होने की चर्चा हुई थी, लेकिन आज तक सड़क का निर्माण नहीं कराया गया. इससे गांव के लोगों में भारी नाराजगी है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि यदि सड़क निर्माण के लिए बजट जारी हुआ था तो उसका उपयोग कहां किया गया. साथ ही उन्होंने दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है.
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गांव के लोग बड़ा जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और युवा मौजूद रहे. अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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