Seaweed Farming: समुद्री शैवाल की खेती में भारत की बड़ी छलांग, सेक्‍टर को और बढ़ावा देगी सरकार

Seaweed Farming: समुद्री शैवाल की खेती में भारत की बड़ी छलांग, सेक्‍टर को और बढ़ावा देगी सरकार

भारत ने समुद्री शैवाल उत्पादन में बीते दस वर्षों में बड़ी छलांग लगाई है. सरकार की नीतियों और बढ़ती औद्योगिक मांग के चलते यह क्षेत्र अब तटीय इलाकों में आजीविका और रोजगार का नया आधार बनता दिख रहा है. एक्सपो में इसकी व्यापक संभावनाएं सामने आई हैं.

Seaweed Farming IndiaSeaweed Farming India
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 30, 2026,
  • Updated Jan 30, 2026, 12:12 PM IST

भारत में समुद्री शैवाल यानी (सीवीड- Seaweed) उत्पादन ने बीते एक दशक में तेज रफ्तार पकड़ी है और यह क्षेत्र अब केवल तटीय आजीविका तक सीमित न रहकर औद्योगिक संभावनाओं का मजबूत आधार बनता जा रहा है. केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया कि वर्ष 2015 में जहां देश का सीवीड उत्पादन करीब 18,890 टन था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 74,083 टन तक पहुंच गया. वे आईसीएआर केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान में आयोजित सातवें इंडिया इंटरनेशनल सीवीड एक्सपो एंड समिट के उद्घाटन सत्र को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे. 

'बिजनेसलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने संबोधन में केंद्रीय राज्‍य मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत सीवीड खेती और इससे जुड़ी उद्योगों के विस्तार की दहलीज पर खड़ा है. यह क्षेत्र टिकाऊ आजीविका, तटीय अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण के लिए एक अहम इंजन बन सकता है.

सीवीड खेती को बड़े पैमाने पर मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से लक्षित योजनाओं और नीतिगत समर्थन के जरिए सीवीड की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा. इससे प्रोसेसिंग क्षमता में इजाफा होगा और तटीय इलाकों में मछुआरों और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. 

सीवीड खेती पीएम धन धान्‍य योजना में शामिल

उन्होंने यह भी बताया कि सीवीड को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत आउटपुट घटक के रूप में शामिल किया गया है, जो देश के 100 आकांक्षी जिलों में लागू की जा रही है. केरल के कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है.

'सीवीड को बढ़ाने के लिए बड़े प्रोसेसिंग प्लांट लगाना जरूरी'

कार्यक्रम में नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी बीके बेहरा ने कहा कि सीवीड क्षेत्र को व्यावसायिक स्तर पर मजबूत करने के लिए बड़े प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करना जरूरी है. उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इस क्षेत्र को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सके.

दो दिवसीय इस एक्सपो में सीवीड से बने खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों की व्यापक झलक देखने को मिली. पोषण पाउडर, पकौड़े, जैम, सॉस, दूध गाढ़ा करने वाले एजेंट और जेलिंग उत्पादों से लेकर साबुन, सीवीड आधारित प्लास्टिक, हस्तनिर्मित कागज, बायो-फर्टिलाइजर, फीड और एयर फ्रेशनर जेल तक प्रदर्शित किए गए.

एक्‍स्‍पो में 10 से ज्‍यादा देशाें के प्रतिनिध हुए शामिल

अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, स्कॉटलैंड, आयरलैंड, मालदीव, इंडोनेशिया, श्रीलंका और तंजानिया सहित 10 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह एक्सपो सीवीड वैल्यू चेन से जुड़े निवेश, साझेदारी और कारोबार के लिए एक अहम मंच बनकर उभरा.

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