एग्रीकल्चर रोडमैप: राज्यों पर कोई दबाव नहीं, पर 'बीज से बाजार' तक का मॉडल बदलेगा किसानों की तकदीर

एग्रीकल्चर रोडमैप: राज्यों पर कोई दबाव नहीं, पर 'बीज से बाजार' तक का मॉडल बदलेगा किसानों की तकदीर

रायसेन के कृषि मेले में एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि खेती का विषय राज्यों के अधिकार में आता है, इसलिए इस पर अंतिम फैसला भी राज्यों का ही होगा. उन्होंने कहा कि सरकार किसी पर कुछ थोपना नहीं चाहती, बल्कि राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहती है.

कृषि रोडमैपकृषि रोडमैप
ओम प्रकाश
  • Bhopal,
  • Apr 12, 2026,
  • Updated Apr 12, 2026, 8:50 AM IST

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार राज्यों के लिए 'एग्रीकल्चर रोडमैप' बनाने को बाध्यकारी (Mandatory) नहीं बनाएगी. रायसेन के कृषि मेले में एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि कृषि 'राज्य का विषय' (State Subject) है, इसलिए अंतिम निर्णय राज्यों का ही होगा. चौहान ने कहा, "हम चाहते हैं कि हर राज्य का अपना रोडमैप हो ताकि किसानों को फायदा मिले, लेकिन अगर कोई राज्य इसे नहीं बनाना चाहता, तो यह पूरी तरह उन पर निर्भर है. हम किसी पर कुछ थोप नहीं रहे हैं."

शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रस्तावित कृषि रोडमैप खेती को पारंपरिक तरीके से हटाकर एक वैज्ञानिक और मुनाफे वाली "बिज़नेस चेन" में बदलने की योजना है. इस रोडमैप का मुख्य मंत्र "बीज से बाजार" तक किसान का हाथ थामना है. यह एक वैज्ञानिक ब्लूप्रिंट है, जिसमें मिट्टी, जलवायु, क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों और कृषि योजनाओं का इंट्रीगेशन होगा. बहरहाल, इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों के क्लस्टर से की जा रही है. रविवार 12 अप्रैल को इसे रिलीज होने बाद साफ होगा कि यह रोडमैप कैसा है.

कृषि रोडमैप क्यों?

मिट्टी और जलवायु के आधार पर फसल चयन: विशेषज्ञ हर जिले की मिट्टी की जांच और वहां के तापमान के आधार पर यह तय करेंगे कि वहां कौन सी फसल (जैसे- दलहन, तिलहन या बागवानी) सबसे ज्यादा पैदावार देगी. इससे किसानों का रिस्क कम होगा.

'बीज से बाजार' की चेन

बीज: क्षेत्र के अनुसार उन्नत और जलवायु-अनुकूल बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना.
बाजार: फसल कटने के बाद उसे कहां बेचना है, इसका पहले से ब्यौरा होगा. इसमें लोकल मंडियों से लेकर एक्सपोर्ट (निर्यात) तक की मैपिंग होगी.
विशेषज्ञों की संयुक्त टीम: इसे तैयार करने के लिए दिल्ली से कृषि वैज्ञानिक और राज्यों के कृषि अधिकारी एक टेबल पर बैठेंगे। यह 'टीम इंडिया' भावना के तहत स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा.

इन राज्यों से होगी शुरुआत

आंध्र प्रदेश इस मॉडल को अपनाने वाला पहला राज्य बन सकता है. इसके बाद राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रोडमैप पर काम शुरू होगा. इन राज्यों में मिट्टी के प्रकार और पानी की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग रणनीतियां बनाई जाएंगी.

विकल्प राज्यों का, लाभ किसानों का

शिवराज सिंह चौहान का यह रुख सहकारी संघवाद की मिसाल है. केंद्र सरकार एक 'रेडीमेड समाधान' दे रही है, जिसे अपनाना या न अपनाना राज्यों के विवेक पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि जो राज्य इस रोडमैप को लागू करेंगे, वहां के किसानों को न केवल बेहतर तकनीक मिलेगी, बल्कि उनकी उपज को सही बाजार मिलने से आय में भी रिकॉर्ड वृद्धि होगी.

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