
वैज्ञानिकों की टेबल पर ब्रह्मांड के सबसे बड़े सवालों की फाइल अभी भी अटकी ही पड़ी है. सवाल, जैसे- जीवन की उत्पत्ति कहां से हुई. सवाल, जैसे- ये दुनिया किसने बनाई. सवाल, जैसे- भगवान है भी कि नहीं. और सवालों की इन्हीं फाइलों के बीच एक सवाल ये भी दबा था कि आलू कहां से आया. हमें पता है कि आपने समोसा खाते वक्त शायद ही कभी सोचा होगा कि आलू कहां से आया. मगर वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब खोजने में सदियों से लगे हुए थे. लेकिन अब आखिरकार हमने इस रहस्य को सुलझा लिया कि आलू का विकास कैसे हुआ. और जवाब बेहद चौंकाने वाला है. आज का आधुनिक आलू असल में करीब 90 लाख साल पहले एक जंगली टमाटर और आलू जैसे दिखने वाले एक पौधे के 'अवैध संबंध' से पैदा हुआ था.
आलू और टमाटर न तो दिखने में एक जैसे होते हैं और न ही उनका स्वाद एक जैसा है. आलू एक स्टार्च वाली जड़ है, जिसका इस्तेमाल हम फ्रेंच फ्राइज़, पराठे और समोसे में करते हैं. वहीं दूसरी ओर, टमाटर एक झाड़ी पर उगता है और दुनिया भर में खाना पकाने में इसके कई तरह के इस्तेमाल होते हैं. लेकिन, इस लव स्टोरी में एक दम बॉलीवुड फिल्म की तरह ट्विस्ट है. यह कहानी शुरू होती है दक्षिण अमेरिका के एंडीज़ पर्वतों से. आज जहां पेरू, बोलिविया और चिली हैं, वहां लाखों साल पहले पौधों की अलग-अलग प्रजातियां विकसित हो रही थीं.
चीन की कृषि विज्ञान अकादमी में वैज्ञानिकों की नई जेनेटिक स्टडी से पता चला है कि टमाटर और “एट्यूबेरोसुम” (Etuberosum) नाम का एक जंगली पौधा करीब 1.4 करोड़ साल पहले एक साझा पूर्वज से अलग हुए थे. खास बात ये है कि एट्यूबेरोसुम देखने में आलू जैसा ही था, लेकिन उसमें आलू की सबसे खास चीज, कंद यानी ट्यूबर नहीं थे. फिर करीब 90 लाख साल पहले प्रकृति ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने खेती और सारा इंसानी इतिहास बदल दिया. Cell में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया है कि एक जंगली टमाटर और एट्यूबेरोसुम के बीच प्राकृतिक संकरण (Hybridization) हुआ.
दोनों पौधों के जीन आपस में मिले और एक नई प्रजाति पैदा हुई, जिसे आलू कहते हैं. 'चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज़' के शोधकर्ता जिन्होंने इस शोध का नेतृत्व किया, सानवेन हुआंग बताते हैं, "हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि कैसे प्रजातियों के बीच हाइब्रिडाइज़ेशन की एक घटना नए लक्षणों के विकास को जन्म दे सकती है, जिससे और भी अधिक प्रजातियों के उभरने का मार्ग प्रशस्त होता है."
आज आलू दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है. गेहूं, मक्का और चावल के साथ-साथ, यह अनुमान लगाया जाता है कि दुनिया भर में लोग जितनी भी कैलोरी लेते हैं, उसमें इनका हिस्सा 80% तक होता है. लेकिन, हर रसोई में पकने वाला यह साधारण-सा आलू, पौधों के एक बहुत ही विविध समूह की सिर्फ एक प्रजाति बस है. आप जानकर हैरान होंगे कि दक्षिण अमेरिका में जंगली आलू की लगभग 140 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो उत्तर में मेक्सिको से लेकर दक्षिण में अर्जेंटीना और चिली तक फैली हुई हैं.
आलू के सबसे पहले पूर्वज एंडीज पर्वतों पर ही हुए और आज भी एंडीज के आदिवासी समुदायों के पास आलू की सैकड़ों पारंपरिक किस्में मौजूद हैं. फिर आलू लगभग 7,000 से 10,000 साल पहले पेरू और बोलीविया में खाने के काम में लिया गया था. फिर, 16वीं सदी के आखिर में पेरू पर हमला करने वाले स्पेनिश विजेताओं ने आलू को यूरोप में पहुंचाया. मगर शुरुआत में लोग आलू से डरते थे क्योंकि वह जमीन के नीचे उगता था, आलू का आकार अजीब लगता था और सबसे बड़ी बात, बाइबिल में उसका जिक्र नहीं था.
तो फिर आलू के पौधों की उत्पत्ति कहां से हुई, इस सवाल ने वैज्ञानिकों को लंबे समय तक उलझन में डाले रखा. यही खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने 450 आधुनिक आलू की किस्मों और 56 जंगली प्रजातियों के जीनोम का अध्ययन किया. स्टडी के दौरान वैज्ञानिक इस बात से हैरान रह गए कि उन्हें हर आलू की प्रजाति में टमाटर और एट्यूबेरोसुम, दोनों का DNA मिला. और यहां से सबसे बड़ा रहस्य खुला.
शोधकर्ताओं ने पाया कि आलू के कंद बनने के पीछे दो खास जीन जिम्मेदार हैं. पहला SP6A, यह जीन टमाटर की कोख से आया. दूसरा जीन है IT1, जो एट्यूबेरोसुम से आया. मगर ये दोनों ही जीन अकेले-अकेले कुछ खास नहीं कर सकते थे. लेकिन जब दोनों एक साथ आए, तब पौधे ने जमीन के नीचे यानी जड़ों में स्टार्च जमा करना शुरू किया और तब जाकर “ट्यूबर” यानी आलू बनने लगे. सीधी सी बात ये है कि आलू असल में दो अलग पौधों की “जेनेटिक पार्टनरशिप” का नतीजा है. SP6A और IT1 जीन की पार्टनरशिप से जब पौधे में कंद (Tuber) बनने की क्षमता विकसित हुई तो ये पौधे के लिए भोजन का भंडार बन गए. कठिन मौसम और ठंड में भी पौधे जीवित रह सके. ये पौधे तेजी से फैलने लगे और नई जगहों पर बस गए.
आलू पर सामने आई यह खोज सिर्फ पौधों की कहानी नहीं है, बल्कि भूगोल की भी कथा है. करीब 60 लाख से 1 करोड़ साल पहले एंडीज़ पर्वत तेजी से ऊपर उठ रहे थे. इससे वहां मौसम बदल रहा था. कहीं अत्यधिक ठंड थी, तो कहीं सूखा और कहीं ऊंचे बंजर इलाके बन रहे थे. ऐसे कठिन माहौल में जीवित रहना आसान नहीं था. लेकिन आलू के पास एक सुपरपावर थी यानी उसका कंद. शुरुआती आलू, जिनमें कंदों में पोषक तत्वों को जमा करने की क्षमता होती थी, वे उस समय के कठोर वातावरण में भी जीवित रह पाए.
ये कंद जमीन के नीचे पानी और ऊर्जा जमा करके रखते थे. इससे पौधा ठंड में बच सकता था, सूखे में जीवित रह सकता था और बिना बीज के भी फैल सकता था. आलू का एक और फायदा यह था कि उनके कंद बिना परागण के ही प्रजनन कर सकते थे. यानी अब आलू को फैलने के लिए बीजों की जरूरत नहीं थी. वे सीधे अपने कंदों से ही नए पौधे उगा सकते थे. ऐसी सुपरपावर के कारण, शुरुआती आलू के पौधे मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के अलग-अलग तरह के पारिस्थितिक तंत्रों में फैल पाए. यही वजह है कि समय के साथ इन्हीं कंद वाले पौधों से लगभग 180 जंगली आलू प्रजातियां विकसित हुईं और दुनिया भर में उगाई जाने वाली हजारों खेती वाली आलू की किस्में बनीं.
टमाटर और एट्यूबरोसम के बीच ये 'शादी' शायद मुमकिन न लगती हो, लेकिन यह यकीनन बहुत फायदेमंद साबित हुई. उनके हाइब्रिड बच्चे को दोनों की सबसे अच्छी खूबियां विरासत में मिलीं. रोशनी को पहचानने की तेज क्षमता, प्रजनन में लचीलापन और कंद का अनोखा गुण, जो प्रकृति का जमीन के नीचे बना भंडारघर है. अलग-अलग जीन्स के इस मेल ने आलू की दुनिया भर में सफलता की नींव रखी, जिससे उसका भौगोलिक विस्तार और विकास की संभावनाएं और भी बढ़ गईं. आखिरकार, यह कोई तय की हुई शादी नहीं थी, बल्कि एक प्राकृतिक 'अवैध मेल' था, एक ऐसा संयोग जिसने इंसानी इतिहास को ही बदल कर रख दिया.
आज आलू दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य फसलों में से एक है. चावल, गेहूं और मक्का के साथ मिलकर यह मानवता की कैलोरी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करता है. आलू कम लागत में ज्यादा उत्पादन देता है. कठिन मौसम में भी इसके खेती संभव है और ऊर्जा से भी भरपूर होता है. यही कारण है कि आलू गरीब से अमीर तक हर रसोई में पहुंच गया. आज जो आलू हम खाते हैं उसका सबसे करीबी रिश्तेदार टमाटर निकला. वैज्ञानिकों का कहना है कि आज का आलू एक तरह से प्राचीन टमाटर और आलू-जैसे पौधे का प्राकृतिक "हाइब्रिड बेटा" है.
ये भी पढ़ें-