
महाराष्ट्र के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार प्याज किसानों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने पर काम करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम दिलाना और उपभोक्ताओं के हितों को भी सुरक्षित रखना है. जयकुमार रावल ने कहा कि महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है. इसमें से करीब 70 प्रतिशत घरेलू खपत में इस्तेमाल हो जाता है, जबकि शेष हिस्सा अतिरिक्त बच जाता है. यही अधिशेष उत्पादन बाजार में कीमतों को गिरा देता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.
दक्षिण मुंबई स्थित सह्याद्रि गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में रावल ने कहा कि प्याज प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने से अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा. प्याज को पाउडर और चिप्स जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों में बदलकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चरणबद्ध तरीके से बेचा जा सकता है.
मंत्री ने इस पहल में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी.
जयकुमार रावल ने कहा कि अधिक उत्पादन होने पर कीमतों में गिरावट आती है, जबकि कमी होने पर दाम बढ़ जाते हैं, जिससे उपभोक्ता प्रभावित होते हैं. ऐसे में प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देना इस असंतुलन को दूर करने का प्रभावी तरीका है.
इस बैठक में महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड, महाराष्ट्र एग्रीबिजनेस नेटवर्क और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसमें प्याज प्रोसेसिंग और भंडारण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई.
इधर, महाराष्ट्र में एग्री-इनपुट और उर्वरक उद्योग से जुड़ी छह प्रमुख संस्थाओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर निरीक्षक-आधारित नियामक व्यवस्था दोबारा लागू न करने की अपील की है. उद्योग संगठनों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था लौटने से राज्य में व्यापार करने की सहजता पर नकारात्मक असर पड़ेगा और पहले किए गए सुधारों को झटका लग सकता है. इन संगठनों ने जून 2025 में लागू निरीक्षक-मुक्त ढांचे को उद्योग और खासकर एमएसएमई के लिए फायदेमंद बताया. संगठनों ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक हस्तक्षेप कम हुआ है, इसलिए मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना जरूरी है. (पीटीआई)