
बायोस्टिमुलेंट यानी पौधों के टॉनिक के नाम पर कई निजी कंपनियां वर्षों से किसानों को धोखा दे रही हैं. इसके नाम पर धोखाधड़ी कृषि क्षेत्र की एक गंभीर समस्या बन गई है. अप्रभावी और फर्जी उत्पाद बेचा जा रहा है. जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में इसे लेकर एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है जो बताता है कि किसान वर्षों से इन कंपनियों की ठगी के शिकार हो रहे हैं. चौहान ने सदन में कहा, 'लगभग 8000 बायोस्टिमुलेंट उत्पादों में से केवल लगभग 500 ही मानकों पर खरे उतरे हैं, बाकी को अनुमति नहीं दी गई.'
शिवराज सिंह चौहान लंबे समय से नकली या दोयम दर्जे के बायोस्टिमुलेंट के खिलाफ एक्शन लेने की बात कर रहे थे. इसकी बिक्री रोकने के लिए यह तय किया गया कि अब केवल आईसीएआर प्रमाणित प्रोडक्ट ही बिकेंगे. आईसीएआर से प्रमाणित करने के बाद मंत्री ने बायोस्टिमुलेंट के नाम पर हो रहे फर्जीवाडे का आंकड़ा सदन में पेश किया. अब यह भी तय किया गया है कि उर्वरकों के साथ इनकी टैगिंग को अवैध काम माना जाएगा.
चौहान ने घोषणा की कि सरकार नया Pesticide Act और Seed Act लाने जा रही है, जिसमें:किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज,मानक खाद, औरसुरक्षित व प्रभावी कीटनाशक सुनिश्चित किए जाएंगे. सरकार ने स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया है कि कोई भी बायो–स्टिम्यूलेंट तभी बाज़ार में बिकेगा जब कम से कम ICAR के संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों में तीन स्वतंत्र परीक्षण यह प्रमाणित कर दें कि उसका लाभ है.
चौहान ने बताया कि Digital Agriculture Mission के तहत अब तक लगभग 9 करोड़ Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं. किसान के पास किसान–आईडी होने पर बैंक में लोन स्वीकृत होने में “एक मिनट” से ज़्यादा नहीं लगना चाहिए, क्योंकि उसकी पूरी प्रोफाइल, जमीन, फसल और लेनदेन का डेटा डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा. पहले किसान को बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, फाइलों–कागज़ों में पैसा और समय दोनों खर्च होते थे, लेकिन अब यह बाधा डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई जा रही है. उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्री–स्टैक डेटा के उपयोग से PM–Kisan से लेकर MSP खरीद तक हर योजना में किसानों को लाभ मिलेगा.
मंत्री ने बताया कि सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नामक AI प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है. किसान खेत से फसल की तस्वीर भेजकर या फोन करके पूछ सकेगा – “फसल में क्या बीमारी है, क्या दवा डालूं, मेरी मिट्टी के मुताबिक कौन सी फसल बोऊं?” उसे उसकी अपनी भाषा में तुरंत सलाह मिलेगी – कौन सी दवा, कौन सा प्रबंधन, कौन सी फसल. मंत्री ने इसे किसान के हाथ में विशेषज्ञ–सलाह और तकनीक का नया हथियार बताया.
कृषि मंत्री ने कहा कि ज्यादा केमिकल फर्टिलाइज़र से धरती मां की सेहत बिगड़ रही है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि उत्पादन से इंकार कर सकती है. उसी भाव से प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 1 करोड़ किसानों को जागरूक, 18 लाख किसानों को ट्रेंड करने और 75 लाख हेक्टेयर में चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अभी लाखों किसान और लाखों हेक्टेयर भूमि जुड़ चुकी है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि सही ढंग से प्राकृतिक खेती करने पर कई मामलों में उत्पादन घटता नहीं, बल्कि बढ़ सकता है, और लागत में भारी कमी आती है. इसीलिए सरकार इसे “भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की अमानत” मानकर आगे बढ़ा रही है.
कृषि राज्य का विषय होने के बावजूद, केंद्र अब हर राज्य के साथ मिलकर एग्रो–क्लाइमेटिक कंडीशन के आधार पर “राज्य कृषि रोडमैप” बना रहा है: कहां कौन सी फसल, कौन सा फल, कौन सी सब्ज़ी उपयुक्त है, किस जिले में कौन सा वैल्यू–चेन विकसित किया जा सकता है, इसके लिए ICAR की विशेषज्ञ टीम और राज्यों के साथ संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जा रही है.
चौहान ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय 140 सिंचाई परियोजनाओं में से 99 दशकों से लटकी पड़ी थीं, जिन पर कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा था. मोदी सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्राथमिकता दी और लगभग 27 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से काम बढ़ाया.
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