मंजर की सही देखभाल से बढ़ेगा आम का उत्पादन, किसानों को मिलेगी बेहतर कीमत

मंजर की सही देखभाल से बढ़ेगा आम का उत्पादन, किसानों को मिलेगी बेहतर कीमत

आम में मंजर अवस्था का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है. विशेषज्ञों ने छंटाई, पोषण, कीट-रोग और जल प्रबंधन पर दी अहम सलाह.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 09, 2026,
  • Updated Feb 09, 2026, 12:30 PM IST

आम (Mangifera indica) भारत का सबसे अधिक लोकप्रिय और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय फल है. उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं. कृषि मंत्रालय (2020–21) के अनुसार देश में लगभग 23.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती से 203.86 लाख टन उत्पादन प्राप्त होता है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा, समस्तीपुर (बिहार) के प्लांट पैथोलॉजी और नेमेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह ने कहा कि बिहार में आम की औसत उत्पादकता 9.67 टन/हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है. यह दिखाता है कि यदि फूल (मंजर) अवस्था का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए, तो उत्पादन और क्वालिटी दोनों में बड़ी वृद्धि संभव है.

उत्तर भारत में आम में मंजर आने की स्थिति

उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में आम में मंजर सामान्यतः फरवरी के दूसरे सप्ताह से निकलना शुरू होता है. यह किस्म, तापमान और स्थानीय मौसम पर निर्भर करता है. मंजर निकलने के लिए आदर्श परिस्थितियां हैं-

•दिन का तापमान: 20–25°C
•रात्रि तापमान: 10–15°C
•तेज धूप और शुष्क वातावरण

अधिक नमी, पाला, असमय बारिश और लगातार बादल रहने से फूलों की क्वालिटी घटती है और कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है.

फूल अवस्था का फल उत्पादन पर प्रभाव

आम के फूल छोटे, पीले या गुलाबी रंग के होते हैं और गुच्छों (पैनिकल) में निकलते हैं. एक ही फूल में नर और मादा दोनों अंग होते हैं, फिर भी पर-परागण से अधिक फल-सेट होता है. मधुमक्खियां, मक्खियां, ततैया, तितलियां और भृंग प्रमुख परागणकर्ता हैं. यह ध्यान रखना जरूरी है कि शुरू में जितने फूल लगते हैं, उनमें से 5% से भी कम फल अंत तक बने रहते हैं. अतः फूल और छोटे फलों का झड़ना एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है.

आम में फूल (मंजर) प्रबंधन की वैज्ञानिक रणनीतियां

1. कटाई-छंटाई और प्रूनिंग क्रियाएं

  • फल तुड़ाई के बाद जून से अगस्त के बीच उचित छंटाई बहुत जरूरी है.
  • घनी छतरी (कैनोपी या पेड़ का ऊपरी हिस्सा) में प्रकाश का प्रवेश कम होता है, जिससे फूल कम आते हैं.
  • टिप प्रूनिंग (अंतिम इंटरनोड से 8–10 सेमी ऊपर) से फूल आने में वृद्धि होती है.
  • गर्डलिंग एक उन्नत तकनीक है, जिससे कार्बोहाइड्रेट का संचय बढ़कर फूल और फल-सेट में सुधार होता है. यह काम केवल प्रशिक्षित व्यक्ति की देखरेख में ही किया जाना चाहिए.

2. मंजर के स्प्रे (PGR) का सुरक्षित उपयोग

  • प्लैनोफिक्स (NAA) @ 1 मि.ली./3 लीटर पानी
  • पहला छिड़काव: मंजर निकलने से ठीक पहले
  • दूसरा छिड़काव: फल मटर के आकार का होने पर

यह टिकोला गिरने को कम करता है और फल आकार और क्वालिटी सुधारता है. PGR का प्रयोग संतुलित मात्रा और सही समय पर ही करें.

3. पोषक तत्व प्रबंधन

  • नाइट्रोजन: अधिक मात्रा में देने से पत्तों की वृद्धि बढ़ती है और फूल आने में कमी आती है.
  • फॉस्फोरस (P): पुष्पन और फल-सेट के लिए जरूरी.
  • पोटाश (K): फूलों की संख्या, फल आकार, क्वालिटी और रोग प्रतिरोध बढ़ाता है.
  • जिंक, बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व फूल गिरने को कम करने में सहायक होते हैं.

4. कीट और रोग प्रबंधन (IPM आधारित, बिना प्रतिबंधित रसायनों के)

मीली बग (गुजिया)

•दिसंबर–जनवरी में बाग की सफाई और हल्की जुताई
•तने पर 30–45 सेमी चौड़ी पॉलीथीन/अल्काथीन पट्टी बांधें
•नीम खली @ 2–3 किग्रा/पेड़
•जरूरत होने पर अजाडिरैक्टिन (नीम आधारित) 1500–3000 ppm @ 3–5 मि.ली./लीटर

आम हॉपर (भुनगा)

जब प्रति बौर 10–12 हॉपर दिखें—
•इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL @ 0.3 मि.ली./लीटर या
•थायमेथोक्साम 25 WG @ 0.25 ग्राम/लीटर
यह छिड़काव फूल खिलने से पहले ही करें.

पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा)

•मंजर से पहले घुलनशील गंधक @ 2 ग्राम/लीटर
•फल-सेट के बाद जरूरत होने पर हेक्साकोनाजोल @ 1 मि.ली./लीटर

गुम्मा (Mango Malformation)

•संक्रमित बौर/टहनी काटकर नष्ट करें
•बाग में स्वच्छता और संतुलित पोषण बनाए रखें

5. परागण प्रबंधन

अच्छे परागण के बिना अच्छी पैदावार संभव नहीं.
•बाग में मधुमक्खी कॉलोनी बॉक्स रखने से फल-सेट 20–30% तक बढ़ सकता है.
•मंजर खिलने की अवस्था में किसी भी रसायन का छिड़काव न करें.

6. जल प्रबंधन-सबसे महत्वपूर्ण “क्या न करें”

•मंजर निकलने से लेकर फल के मटर आकार तक सिंचाई न करें
•इस अवधि में सिंचाई करने से फूल झड़ जाते हैं
•अधिक या कम पानी-दोनों ही हानिकारक हैं

7. मौसम और संरक्षण उपाय

तेज हवा, पाला और असमय बारिश फूल झड़ने का प्रमुख कारण हैं. विंड ब्रेक/शेल्टर बेल्ट लगाना लाभकारी है.

डॉ. एसके सिंह ने कहा, आम में अधिक और क्वालिटी वाला उत्पादन का आधार वैज्ञानिक मंजर प्रबंधन है. संतुलित पोषण, सही समय पर छंटाई, IPM आधारित कीट-रोग प्रबंधन, परागण संरक्षण, जल और मौसम प्रबंधन-इन सभी के तालमेल से ही टिकाऊ, सुरक्षित और लाभकारी आम उत्पादन संभव है.

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