
महाराष्ट्र में खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगी महिलाओं को अलग पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य की विधान परिषद ने मंगलवार को महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इससे पहले यह विधेयक पिछले हफ्ते विधानसभा से भी मंजूरी हासिल कर चुका था. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने इसे विधान परिषद में पेश किया.
विधेयक का उद्देश्य उन महिलाओं को भी किसान का दर्जा देना है, जो खेती या कृषि से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं, लेकिन उनके नाम पर कृषि भूमि दर्ज नहीं है. सरकार का मानना है कि अधिकांश कृषि योजनाओं में भूमि स्वामित्व की शर्त होने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं सरकारी सहायता, सब्सिडी, संस्थागत लोन और अन्य सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं.
नए कानून के तहत खेती करने वाली महिलाओं के अलावा पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, लघु वनोपज संग्रह और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ी महिलाओं को भी महिला किसान के रूप में मान्यता दी जाएगी. अब तक ऐसी महिलाओं को किसान के बजाय कृषि मजदूर माना जाता था, जिससे उन्हें कई सरकारी लाभ नहीं मिल पाते थे.
विधेयक के अनुसार, पात्र महिलाओं को महिला किसान प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. इस प्रमाणपत्र के आधार पर वे सरकारी योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी, सेवाओं और संस्थागत लोन जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकेंगी. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने सदन में कहा कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र महिलाओं को इस कानून के तहत महिला किसान के रूप में मान्यता और लाभ दिए जाएंगे.
महिला किसानों के सशक्तिकरण के लिए कानून में महिला किसान सशक्तिकरण परिषद, महिला किसान सशक्तिकरण प्रकोष्ठ, राज्य स्तरीय निगरानी समिति और महाराष्ट्र राज्य महिला किसान कोष बनाने का भी प्रावधान किया गया है.
इस कोष का इस्तेमाल महिला किसानों के कल्याण, विकास और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा. इसमें केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान के साथ अन्य स्रोतों से प्राप्त राशि भी जमा की जाएगी.
विधेयक पर चर्चा के दौरान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं खेती से जुड़ी हैं, लेकिन बहुत कम महिलाओं के नाम पर जमीन है. ऐसे में यह कानून उन्हें प्रोत्साहन और पहचान देगा. वहीं, शिवसेना की नीलम गोरहे ने भी विधेयक का स्वागत करते हुए इसे महिला किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया. (पीटीआई)