खरीफ सीजन पर मौसम की मार, पिछले साल से 38 लाख हेक्टेयर कम हुई बुवाई, गन्ने का बढ़ा रकबा

खरीफ सीजन पर मौसम की मार, पिछले साल से 38 लाख हेक्टेयर कम हुई बुवाई, गन्ने का बढ़ा रकबा

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 में फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में 38.82 लाख हेक्टेयर घट गई है. मानसून की धीमी शुरुआत से धान, दालें, मोटे अनाज और कपास का रकबा कम हुआ है. हालांकि गन्ने और जूट की खेती में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अब किसानों की उम्मीद अच्छी बारिश पर टिकी है.

खरीफ बुवाई में 38.82 लाख हेक्टेयर की कमीखरीफ बुवाई में 38.82 लाख हेक्टेयर की कमी
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 28, 2026,
  • Updated Jul 28, 2026, 8:35 AM IST

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 24 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई के ताजा आंकड़े जारी कर दिए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में कम हुई है. 24 जुलाई 2026 तक कुल 787.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 826.19 लाख हेक्टेयर में बुवाई दर्ज की गई थी. यानी इस साल कुल 38.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम बुवाई हुई है. मॉनसून की धीमी शुरुआत और कई राज्यों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.

धान की बुवाई में 6.19 लाख हेक्टेयर की कमी

देश में धान की बुवाई इस साल 234.43 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 240.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाया गया था. यानी धान की खेती में 6.19 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.

धान की बुवाई में सबसे अधिक कमी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में देखी गई. वहीं असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और आंध्र प्रदेश में धान का रकबा बढ़ा है. बिहार और असम में अच्छी बारिश के कारण किसानों ने पिछले साल की तुलना में अधिक क्षेत्र में धान लगाया है.

दालों की खेती भी घटी, उड़द ने दिखाई बढ़त

इस वर्ष दालों की कुल बुवाई 84.57 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल यह 91.46 लाख हेक्टेयर थी. यानी दालों की खेती में 6.90 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.

सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा में दर्ज की गई. वहीं उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में दालों की बुवाई बढ़ी है.

फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अरहर और मूंग के रकबे में कमी आई है, जबकि उड़द की खेती में लगभग 1.39 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

श्री अन्न और मोटे अनाज की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

श्री अन्न (मिलेट्स) और मोटे अनाज की बुवाई में इस साल सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. 24 जुलाई तक इन फसलों की बुवाई 142.21 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 161.49 लाख हेक्टेयर थी. यानी 19.28 लाख हेक्टेयर की बड़ी कमी आई है.

इस श्रेणी में राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बुवाई घटी है. दूसरी ओर मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड में मोटे अनाज का रकबा बढ़ा है.

बाजरा, मक्का, ज्वार और रागी जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है.

तिलहन की बुवाई भी घटी, सूरजमुखी और तिल में बढ़ोतरी

तिलहन फसलों की कुल बुवाई इस साल 163.54 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष 167.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी. यानी 3.45 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई.

सबसे अधिक गिरावट महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में देखने को मिली. वहीं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में तिलहन का रकबा बढ़ा है.

फसलवार आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई कम हुई है, जबकि सूरजमुखी और तिल की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

गन्ने की खेती बढ़ी, किसानों ने बढ़ाया रकबा

जहां अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई घटी है, वहीं गन्ने की खेती में बढ़ोतरी हुई है. इस वर्ष 57.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 56.72 लाख हेक्टेयर थी. यानी 0.86 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है. गन्ने का रकबा सबसे अधिक कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बढ़ा है, जबकि पंजाब और मध्य प्रदेश में इसमें कमी दर्ज की गई.

जूट और मेस्ता में भी हल्की बढ़ोतरी

जूट और मेस्ता की खेती इस साल 6.32 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 6.19 लाख हेक्टेयर से अधिक है. यानी 0.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. इसका सबसे बड़ा योगदान बिहार से आया है, जहां जूट की खेती का क्षेत्र बढ़ा है.

कपास की खेती में लगभग 4 लाख हेक्टेयर की गिरावट

कपास की बुवाई इस वर्ष 98.72 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 102.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास लगाया गया था. यानी 3.99 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.

कपास की खेती में सबसे अधिक गिरावट महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब में देखने को मिली. हालांकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा बढ़ा है.

मॉनसून की रफ्तार पर टिकी किसानों की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों की बुवाई में आई कमी की सबसे बड़ी वजह मॉनसून की धीमी शुरुआत और कई राज्यों में समय पर पर्याप्त बारिश का नहीं होना है. हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में मॉनसून सक्रिय हुआ है. यदि आने वाले दिनों में अच्छी और लगातार बारिश होती है तो कई राज्यों में देर से बुवाई का क्षेत्र बढ़ सकता है. कृषि क्षेत्र की नजर अब मानसून की अगली चाल पर टिकी है, क्योंकि आने वाले सप्ताह खरीफ उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

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