
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 24 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई के ताजा आंकड़े जारी कर दिए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में कम हुई है. 24 जुलाई 2026 तक कुल 787.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 826.19 लाख हेक्टेयर में बुवाई दर्ज की गई थी. यानी इस साल कुल 38.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम बुवाई हुई है. मॉनसून की धीमी शुरुआत और कई राज्यों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.
देश में धान की बुवाई इस साल 234.43 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 240.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाया गया था. यानी धान की खेती में 6.19 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.
धान की बुवाई में सबसे अधिक कमी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में देखी गई. वहीं असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और आंध्र प्रदेश में धान का रकबा बढ़ा है. बिहार और असम में अच्छी बारिश के कारण किसानों ने पिछले साल की तुलना में अधिक क्षेत्र में धान लगाया है.
इस वर्ष दालों की कुल बुवाई 84.57 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल यह 91.46 लाख हेक्टेयर थी. यानी दालों की खेती में 6.90 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.
सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा में दर्ज की गई. वहीं उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में दालों की बुवाई बढ़ी है.
फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अरहर और मूंग के रकबे में कमी आई है, जबकि उड़द की खेती में लगभग 1.39 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
श्री अन्न (मिलेट्स) और मोटे अनाज की बुवाई में इस साल सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. 24 जुलाई तक इन फसलों की बुवाई 142.21 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 161.49 लाख हेक्टेयर थी. यानी 19.28 लाख हेक्टेयर की बड़ी कमी आई है.
इस श्रेणी में राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बुवाई घटी है. दूसरी ओर मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड में मोटे अनाज का रकबा बढ़ा है.
बाजरा, मक्का, ज्वार और रागी जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है.
तिलहन फसलों की कुल बुवाई इस साल 163.54 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष 167.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी. यानी 3.45 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई.
सबसे अधिक गिरावट महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में देखने को मिली. वहीं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में तिलहन का रकबा बढ़ा है.
फसलवार आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई कम हुई है, जबकि सूरजमुखी और तिल की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
जहां अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई घटी है, वहीं गन्ने की खेती में बढ़ोतरी हुई है. इस वर्ष 57.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष यह 56.72 लाख हेक्टेयर थी. यानी 0.86 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है. गन्ने का रकबा सबसे अधिक कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बढ़ा है, जबकि पंजाब और मध्य प्रदेश में इसमें कमी दर्ज की गई.
जूट और मेस्ता की खेती इस साल 6.32 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 6.19 लाख हेक्टेयर से अधिक है. यानी 0.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. इसका सबसे बड़ा योगदान बिहार से आया है, जहां जूट की खेती का क्षेत्र बढ़ा है.
कपास की बुवाई इस वर्ष 98.72 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 102.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास लगाया गया था. यानी 3.99 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
कपास की खेती में सबसे अधिक गिरावट महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब में देखने को मिली. हालांकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा बढ़ा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों की बुवाई में आई कमी की सबसे बड़ी वजह मॉनसून की धीमी शुरुआत और कई राज्यों में समय पर पर्याप्त बारिश का नहीं होना है. हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में मॉनसून सक्रिय हुआ है. यदि आने वाले दिनों में अच्छी और लगातार बारिश होती है तो कई राज्यों में देर से बुवाई का क्षेत्र बढ़ सकता है. कृषि क्षेत्र की नजर अब मानसून की अगली चाल पर टिकी है, क्योंकि आने वाले सप्ताह खरीफ उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
ये भी पढ़ें:
गोरखपुर समेत UP के इन जिलों में आज होगी मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी सौगात! 82.70 लाख किसानों के खातों में पहुंचे ₹3308 करोड़