Professor KC Bansal का खुलासा- 1965 में अमेरिका ने भारत को गेहूं के लिए किया था ब्लैकमेल

Professor KC Bansal का खुलासा- 1965 में अमेरिका ने भारत को गेहूं के लिए किया था ब्लैकमेल

प्रोफेसर केसी बंसल ने किसान तक के इंटरव्यू में कहा, 1965 में अमेरिका द्वारा भारत को गेहूं के लिए ब्लैकमेल किए जाने का खुलासा किया. उन्होंने जीन एडिटिंग और जीएम फसलों की तकनीक को सरल भाषा में समझाया और बताया कि कैसे ये तकनीक भारत में फसलों की पैदावार बढ़ाकर किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.

प्रोफेसर केसी बंसल का खुलासाप्रोफेसर केसी बंसल का खुलासा
प्राची वत्स
  • Noida,
  • Feb 23, 2026,
  • Updated Feb 23, 2026, 2:01 PM IST

भारत में खेती और किसानों की मदद के लिए विज्ञान ने हमेशा बड़ी भूमिका निभाई है. प्रोफेसर केसी बंसल, जो कि एक बहुत प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे नई तकनीकें जैसे जीन एडिटिंग और जीएम फसलें हमारे देश की खेती और खाद्य सुरक्षा में मदद कर सकती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 1965 में अमेरिका ने भारत को गेहूं के लिए ब्लैकमेल किया था, और इसी वजह से भारत ने अपनी खेती में सुधार करने की जरूरत महसूस की.

जीन एडिटिंग क्या है?

जीन एडिटिंग एक नई तकनीक है, जिसमें पौधों के अंदर पहले से मौजूद जीन को थोड़ा बदलकर उनकी ताकत बढ़ाई जाती है. इसका मतलब यह है कि कोई नया जीन बाहर से नहीं डाला जाता, सिर्फ पहले से मौजूद जीन में सुधार किया जाता है. प्रोफेसर बंसल ने बताया कि भारत ने हाल ही में इस तकनीक का उपयोग करके दो नई चावल की किस्में बनाई हैं. ये चावल सूखे इलाके और कम पानी में भी अच्छे से उगते हैं और ज्यादा अन्न देते हैं.

जीएम फसलों पर रिसर्च और सुरक्षा

कुछ लोग जीएम फसलों को लेकर डरते हैं. प्रोफेसर बंसल ने बताया कि पिछले 25 सालों में 4,500 से ज्यादा स्टडीज की गई हैं और किसी में भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया. वे कहते हैं कि जीएम फसलें बहुत सख्त नियमों और सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत बनाई जाती हैं. उदाहरण के लिए, बीटी कॉटन तकनीक ने भारत में कपास की पैदावार बहुत बढ़ा दी. इससे किसानों को अच्छा फायदा हुआ.

भारत में जीन एडिटिंग का भविष्य

प्रोफेसर बंसल ने बताया कि भारत में जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल 40 से ज्यादा फसलों में हो रहा है. इनमें गेहूं, मक्का, दालें, तिलहन और सब्जियां शामिल हैं. इस तकनीक से छोटे किसान भी लाभ उठा सकते हैं क्योंकि इससे कम पैसे में ज्यादा उत्पादन किया जा सकता है. इसका मतलब है कि किसान कम खर्च में ज्यादा अनाज उगा सकते हैं.

जीएम और जीन एडिटिंग पर विरोध

कुछ लोग नई तकनीकों का विरोध कर रहे हैं. प्रोफेसर बंसल कहते हैं कि यह विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग विज्ञान को सही से समझने की कोशिश नहीं कर रहे. उन्होंने बताया कि यूरोप जैसे देशों में लोग धीरे-धीरे जीन एडिटिंग को स्वीकार कर रहे हैं. इसका मतलब है कि दुनिया में नई तकनीकें धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं.

कृषि में तकनीकी क्रांति की जरूरत

भारत में जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन खेती के लिए जमीन कम है. इसलिए फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है. प्रोफेसर बंसल ने कहा कि जल्दी पकने वाली और मजबूत फसलें बनाना किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होगा. इससे किसान ज्यादा अन्न उगा सकेंगे और देश में भूख की समस्या कम होगी.

इस साक्षात्कार से यह साफ है कि विज्ञान और तकनीक किसानों की मदद कर सकती है और भारत की खेती को और मजबूत बना सकती है. प्रोफेसर केसी बंसल ने यह भी दिखाया कि नई तकनीकें जैसे जीन एडिटिंग और जीएम फसलें हमारे देश की खाद्य सुरक्षा के लिए कितनी जरूरी हैं.

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