बढ़ती गर्मी से खेती पर संकट: UN रिपोर्ट में उत्पादन, पशुधन और मछली पालन पर गंभीर खतरे की चेतावनी

बढ़ती गर्मी से खेती पर संकट: UN रिपोर्ट में उत्पादन, पशुधन और मछली पालन पर गंभीर खतरे की चेतावनी

FAO और WMO की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती गर्मी खेती, पशुधन और मछली पालन के लिए बड़ा खतरा बन रही है. इससे उत्पादन घट रहा है, मजदूरों की सेहत पर असर पड़ रहा है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर संकट गहरा रहा है.

खेती पर गर्मी का खतरा बढ़ता जा रहा हैखेती पर गर्मी का खतरा बढ़ता जा रहा है
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Apr 23, 2026,
  • Updated Apr 23, 2026, 12:57 PM IST

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती गर्मी खेती और खेती से जुड़े लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा गर्मी की वजह से हर साल दुनिया भर में करीब 50 करोड़ काम के घंटे बर्बाद हो रहे हैं. जैसे-जैसे धरती का तापमान बढ़ेगा, यह नुकसान और भी ज्यादा होगा.

खेती पर कैसे असर पड़ रहा है?

WMO की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने कहा कि अत्यधिक गर्मी खेती के काम करने के हालात को बदल रही है और पहले से मौजूद कमजोरियों को और बढ़ा रही है. गर्मी बढ़ने से खेती में काम करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ रही है. खेती में लगने वाला श्रम घटेगा तो उत्पादन घट सकता है.

फसलें

ज्यादातर फसलों की पैदावार 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान होने पर कम होने लगती है. इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और अनाज कम पैदा होता है. आनेव वाले समय में ऐसी ही परिस्थिति बन सकती है जिससे अनाज उत्पादन खतरे में पड़ सकता है.

पशुधन

गाय, सूअर और मुर्गियों पर गर्मी का बुरा असर पड़ता है. बहुत गर्मी में उनका बढ़ना रुक जाता है, दूध कम होता है और कभी-कभी उनकी जान भी खतरे में पड़ जाती है.

मछलियां और समुद्र

समुद्र का पानी गर्म होने से ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है, जिससे मछलियां परेशान हो रही हैं. साल 2024 में दुनिया के 91% समुद्रों में समुद्री लू देखी गई. इससे मछलियों की मरने की दर बढ़ गई जिससे मछुआरों की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है.

जंगल

ज्यादा गर्मी से जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ता है और पेड़ों की बढ़त भी रुक जाती है. इससे पर्यावरण पर खतरा और प्रदूषण का जोखिम बढ़ जाता है.

इंसानों पर भी असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई इलाकों में साल में 250 दिन तक काम करना बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे खेतों में काम करने वाले लाखों मजदूरों की सेहत और जान को खतरा है और खाने की चीजों का उत्पादन भी घटेगा.

कुछ जगह हालात बहुत खराब

किर्गिस्तान (2025) में तेज गर्मी से अनाज की पैदावार 25% घट गई, टिड्डियों का हमला बढ़ा और पानी की कमी हो गई.
ब्राजील (2023–2024) में लंबे समय तक गर्मी और सूखे की वजह से सोयाबीन की पैदावार 20% तक कम हो गई.
उत्तरी अमेरिका (2021) में भीषण गर्मी से फलों की फसलें खराब हुईं और जंगलों में आग बढ़ी.

समाधान क्या है?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. जैसे, गर्मी सहन करने वाली फसलें उगाना जरूरी है. बुवाई का समय बदलना, खेती के बेहतर तरीके अपनाना, किसानों के लिए समय पर चेतावनी प्रणाली जारी करना और किसानों को बीमा, आर्थिक मदद देना बहुत जरूरी है.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि खेती और खाने को बचाने के लिए सिर्फ खेतों को मजबूत बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि प्रदूषण और तेज उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे. आसान शब्दों में कहा जाए तो अगर गर्मी से नहीं लड़े, तो भविष्य की खेती और भोजन दोनों खतरे में होंगे.

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