
मुंबई की विशेष PMLA अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में NCP (SP) विधायक रोहित पवार समेत 16 अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया है. अदालत के इस आदेश के साथ मामले में दर्ज कार्यवाही समाप्त कर दी गई है. वहीं, विस्तृत आदेश आना बाकी है. यह मामला वर्ष 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज ECIR से जुड़ा था, जिसकी शुरुआत मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की FIR से हुई थी.
यह एफआईआर बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी. आरोपों के अनुसार, वर्ष 2005 से 2010 के बीच MSCB द्वारा सहकारी चीनी मिलों को दिए गए लोन के बाद उन मिलों की बिक्री कथित रूप से कम कीमत पर की गई. इस प्रक्रिया में बैंक को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया था.
ED ने वर्ष 2023 से 2025 के बीच दाखिल चार्जशीट में रोहित पवार, विभिन्न एग्रो और शुगर कंपनियों और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े संस्थानों को आरोपी बनाया था. एजेंसी ने आरोप लगाया था कि संबंधित इकाइयों ने चीनी मिलों का अधिग्रहण कम मूल्य पर किया और इस प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े तत्व सामने आए.
मामले में 27 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ, जब मुंबई की एक अदालत ने EOW द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. यह रिपोर्ट वर्ष 2020 और 2024 में दायर की गई थी. इस आदेश के बाद मूल FIR बंद कर दी गई.
इसके बाद आरोपियों ने विशेष PMLA अदालत में डिस्चार्ज के लिए आवेदन किया. उनका तर्क था कि मूल अपराध समाप्त होने के बाद PMLA के तहत कार्यवाही जारी नहीं रह सकती. ED ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि अदालत तथ्यों के आधार पर मामले की सुनवाई जारी रख सकती है.
विशेष अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपियों की अर्जी स्वीकार करते हुए सभी 17 आरोपियों को आराेपमुक्त कर दिया. अदालत के आदेश में कहा गया कि संबंधित PMLA मामले में दाखिल आवेदन स्वीकार किया जाता है और आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की जाती है. आदेश के अनुसार, आरोपियों के जमानत बॉन्ड भी निरस्त कर दिए गए हैं. (एएनआई)