जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती बनी किसानों की कमाई का नया जरिया, सरकार बढ़ा रही दायरा

जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती बनी किसानों की कमाई का नया जरिया, सरकार बढ़ा रही दायरा

जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनकर उभर रही है. गांदरबल में आयोजित पहले लैवेंडर फेस्टिवल में सामने आया कि अरोमा मिशन के तहत शुरू हुई यह पहल अब व्यावसायिक मॉडल का रूप ले चुकी है. बेहतर बाजार, एसेंशियल ऑयल की मांग और वैल्यू एडिशन से किसान पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक कमाई कर रहे हैं.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 20, 2026,
  • Updated Jun 20, 2026, 12:29 PM IST

जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती किसानों के लिए कमाई का नया विकल्प बनकर उभर रही है. गांदरबल में आयोजित पहले लैवेंडर फेस्टिवल के दौरान यह सामने आया कि सरकारी पहल के तौर पर शुरू हुई यह फसल अब कई जिलों में व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जा रही है. बेहतर बाजार और ज्यादा आय की संभावना के कारण किसान पारंपरिक फसलों से लैवेंडर की तरफ रुख कर रहे हैं.

पारंपरिक फसलों से ज्यादा मिल रहा लाभ

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, बारामूला के किसान मोहम्मद अशरफ ने बताया कि लैवेंडर से मिलने वाला रिटर्न मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक है. यही वजह है कि किसानों की इसमें रुचि लगातार बढ़ रही है.

अरोमा मिशन से शुरू हुआ विस्तार

लैवेंडर खेती का विस्तार केंद्र सरकार के अरोमा मिशन के तहत सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन की पहल से शुरू हुआ था. समय के साथ यह पहल बाजार आधारित खेती के मॉडल में बदलती गई और अब इसे आय बढ़ाने वाली फसल माना जा रहा है.

फूल और तेल दोनों से हो रही कमाई

लैवेंडर से निकाला जाने वाला एसेंशियल ऑयल इत्र, साबुन, कॉस्मेटिक, वेलनेस और दवा उद्योग में इस्तेमाल होता है. किसान सूखे फूल बेचकर भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. किसानों के अनुसार, एक किलो सूखे फूल की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक मिल जाती है.

कई जिलों तक पहुंची खेती

डोडा, रामबन, उधमपुर, अनंतनाग, पुलवामा और गांदरबल समेत कई जिलों में अब लैवेंडर की खेती की जा रही है. करीब 1200 हेक्टेयर क्षेत्र इसके दायरे में आ चुका है.

क्लस्टर मॉडल और प्रोसेसिंग पर जोर

होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत सरकार क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम कर रही है. 14 लैवेंडर क्लस्टर संचालित किए जा चुके हैं जिनसे 1105 किसान जुड़े हैं. इसके साथ एफपीओ, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिलेगा तकनीकी सहयोग

गांदरबल के बेनहामा में औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है. यहां किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेती और प्रोसेसिंग से जुड़ी सहायता दी जाएगी.

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