पिछले साल से कम है गन्ने की बुवाईकृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 12 जून, 2026 तक पूरे भारत में गन्ने की बुआई 54.08 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई. यह आंकड़ा फसल के सामान्य कवरेज के लगभग बराबर है, लेकिन पिछले सीजन में दर्ज किए गए क्षेत्र से कम है. सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि इस साल गन्ने का रकबा 54.20 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र के करीब है. यह सामान्य क्षेत्र 2020-21 और 2024-25 के बीच औसत कवरेज के आधार पर तय किया गया है. हालांकि, पिछले सीजन की तुलना में यह क्षेत्र कम रहा.
2025 सीजन के अंत तक गन्ने की खेती 58.84 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जिससे मौजूदा कवरेज पिछले साल के अंतिम स्तर से लगभग 4.76 लाख हेक्टेयर पीछे है. 2025 के आंकड़ों से पीछे रहने के बावजूद, गन्ना उन कुछ फसलों में से एक है जिसने खरीफ सीजन की शुरुआत में ही अपना लगभग पूरा सामान्य क्षेत्र हासिल कर लिया है. यह ट्रेंड फसल की लंबी अवधि और मुख्य रूप से बारहमासी खेती के पैटर्न को दिखाता है, जो कई अन्य खरीफ फसलों से अलग है जिनकी बुवाई आमतौर पर मॉनसून के आगे बढ़ने के साथ बाद में की जाती है.
सभी खरीफ फसलों में, 12 जून तक कुल क्षेत्र कवरेज 84.60 लाख हेक्टेयर था. यह 1,104.46 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र और 2025 में दर्ज 1,134.27 लाख हेक्टेयर के अंतिम कवरेज से काफी कम है, जो बताता है कि अधिकांश फसलों की बुवाई अभी शुरुआती चरण में है. प्रमुख फसलों में, धान की बुवाई 4.98 लाख हेक्टेयर के साथ सबसे आगे रही, इसके बाद मोटे अनाज (4.77 लाख हेक्टेयर) और तिलहन (3.51 लाख हेक्टेयर) का स्थान रहा.
कपास की बुवाई 9.53 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि दालों का रकबा 1.55 लाख हेक्टेयर रहा. जूट और मेस्टा का कुल रकबा 6.18 लाख हेक्टेयर था, जो उनके 6.40 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र से थोड़ा कम है. मंत्रालय खरीफ सीजन के दौरान हर हफ्ते बुवाई के आंकड़े इकट्ठा और प्रकाशित करता है ताकि गन्ना, अनाज, दालें, तिलहन और नकदी फसलों जैसी प्रमुख फसल श्रेणियों के लिए ऐतिहासिक औसत के मुकाबले प्रगति पर नजर रखी जा सके.
गन्ना उत्पादन में यूपी के बाद महाराष्ट्र का दूसरा नाम है, लेकिन इस बार अल नीनो का बड़ा असर देखा जा रहा है. भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रभाव गन्ने की फसल पर भी है. पुणे के इंदापुर तालुका के पश्चिमी हिस्से में हजारों एकड़ में फैली गन्ने और दूसरी फसलें पानी की कमी के कारण सूख गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. किसान इस संकट के लिए खड़कवासला सिंचाई विभाग के खराब और बिना योजना के काम-काज को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
प्रभावित किसानों ने मांग की है कि सरकार तुरंत फसल के नुकसान का आकलन करे और हुए नुकसान के लिए आर्थिक मुआवज़ा दे. उनका कहना है कि इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है.
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