समुद्र तल से निकली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला के मुसाबनी और उसकी सीमा से सटे गुड़ाबंदा प्रखंड में स्थित है. गुड़ाबंदा प्रखंड दुनिया के सबसे बेहतर क्वालिटी के पन्ना के लिए मशहूर है, लेकिन अब साल के जंगल से आच्छादित इस प्रखंड की पहाड़ियों के भूगर्भ में अब पन्ना रत्न के बाद यूरेनियम का भंडार भी मिला है. वर्ष 2021 में अगस्त महीने में अधीनस्थ परमाणु खनिज अन्वेषण और अनुसंधान निदेशालय , परमाणु उर्जा विभाग ने इस क्षेत्र में यूरेनियम की खोज के लिए कन्यालुका गांव में ड्रिलिंग शुरू की थी.
तीन साल में 17.78 एकड़ में 6 सौ मीटर तक लगभग 125 ड्रिलिंग करने के बाद पता चला है कि भूगर्भ में उत्तम क्वालिटी के यूरेनियम का भंडार छिपा है. इस सर्वे के तहत 5.05 एकड़ वन भूमि में 70 ड्रिलिंग की गई, जबकि शेष लगभग 55 ड्रिलिंग सरकारी और बांटी गई जमीन में की गई. रैयत में जिन जमीन मालिकों के जमीन के नीचे यूरेनियम मिला है, उनमें कंडारी संथाल, वैधनाथ संथाल, दासी संथाल और रामजीत संथाल शामिल हैं.
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वर्ष 2015-16 में ही हवाई सर्वे के दौरान यूरेनियम मिलने के लिए संकेत मिले थे. इस सर्वे को हेली-बोर्न भू-भौतिकी तकनीक कहा जाता है. इस तकनीक के जरिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से जमीन के 600 मीटर की गहराई तक 3D तस्वीर ली गई. जमीन के नीचे की संरचना का विस्तृत अध्ययन किया गया. भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय भौतिक अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित की गई यह तकनीक यूरेनियम भंडार की पहचान में कारगर साबित हुई. कन्यालुका में मिले यूरेनियम का ग्रेड सम्भवतः 0.5% प्रतिशत है.
कन्यालुका के बगल में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड का बागजाता माइंस स्थित है. यह खदान मुसाबनी प्रखंड के अंतर्गत आती है. मालूम हो कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की 7 खदानें है. स्थानीय विधायक और झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के गुड़ाबंदा प्रखंड में मिला यूरेनियम भंडार देश को उर्जा के क्षेत्र में समृद्धि प्रदान करेगा. यह राज्य और देश के लिए खुशी की बात है. इससे रोजगार के अवसर भी खुलेंगे. ( सत्यजीत कुमार और मृत्युंजय सिंह की रिपोर्ट)