
फिरोजपुर में इस साल धान की फसल के बाद 11 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पराली निकलने का अनुमान है. इतनी बड़ी मात्रा में पराली का प्रबंधन जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. पराली जलाने से रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार जिले में जीरो बर्निंग का लक्ष्य रखा है. किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेतों में जाकर जागरूक भी किया जा रहा है.
फिरोजपुर जिले में इस साल करीब 1.86 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हुई है. इसमें करीब 1.56 लाख हेक्टेयर में नॉन-बासमती धान और लगभग 30 हजार हेक्टेयर में बासमती धान लगाया गया है. धान की कटाई के बाद इससे 11 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पराली निकलने का अनुमान है. एडिशनल डिप्टी कमिश्नर कृष्णा पाल राजपूत ने आज तक को बताया कि जिले के 645 गांवों के 75 हजार से ज्यादा किसान धान की खेती से जुड़े हैं. ऐसे में इतने बड़े क्षेत्र में निकलने वाली पराली का समय पर प्रबंधन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है.
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने इस बार जिले में जीरो बर्निंग का लक्ष्य रखा है. प्रशासन का कहना है कि पराली को खेत में जलाने के बजाय मशीनों की मदद से उसका प्रबंधन किया जाएगा. इसके लिए जिले में पराली प्रबंधन की क्षमता बढ़ाकर करीब 6 लाख मीट्रिक टन कर दी गई है. प्रशासन के अनुसार, 130 से ज्यादा बैलर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं. इन मशीनों को किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटरों और कृषि संस्थानों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है.
प्रशासन का कहना है कि छोटे किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनरी उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. गांव स्तर पर मशीनरी मालिकों की सूची भी तैयार की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसान आसानी से मशीनरी ले सकें. किसानों को मशीनों और पराली प्रबंधन के दूसरे तरीकों की जानकारी देने के लिए गांवों और खेतों में भी कर्मचारी भेजे जा रहे हैं. प्रशासन की कोशिश है कि किसान धान की कटाई के बाद पराली को जलाने के बजाय उसका सही तरीके से प्रबंधन करें.
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले में 79 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है. इसके अलावा 550 से ज्यादा फील्ड और ब्लॉक स्तर के कर्मचारी भी इस काम में लगाए गए हैं. ये कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों से बात कर रहे हैं और उन्हें पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों की जानकारी दे रहे हैं. प्रशासन का कहना है कि खेतों तक मशीनरी पहुंचाना इस पूरी योजना का अहम हिस्सा है, क्योंकि समय पर मशीन नहीं मिलने पर किसानों के सामने पराली निपटाने की परेशानी बढ़ जाती है.
प्रशासन ने पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है. जिले में अब तक पराली जलाने के पांच मामले सामने आए हैं. इन मामलों में जुर्माना लगाया गया है और करीब 15 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है. इसके साथ ही संबंधित किसानों की जमाबंदी में रेड एंट्री की जा रही है. प्रशासन की ओर से एफआईआर की कार्रवाई भी की जा रही है. इसका मकसद किसानों को पराली जलाने से रोकना और उन्हें दूसरे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की फ्लाइंग स्क्वॉड भी फिरोजपुर में रैंडम चेकिंग करेगी. यह टीम 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक जिले में जांच करेगी. प्रशासन के मुताबिक, टीम खेतों और गांवों में जाकर पराली जलाने की घटनाओं की जांच करेगी. इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कहीं किसान पराली को खेत में तो नहीं जला रहे हैं.
हालांकि किसानों का कहना है कि पराली प्रबंधन की सबसे बड़ी समस्या छोटे किसानों के सामने है. जिन किसानों के पास एक से पांच एकड़ तक जमीन है, उन्हें कई बार समय पर मशीनरी नहीं मिल पाती. किसानों के मुताबिक, पराली हटाने में मशीनों और मजदूरी का खर्च भी काफी बढ़ जाता है. छोटे किसानों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता. ऐसे में कुछ किसान मजबूरी में पराली को खेत में ही जला देते हैं.
किसानों ने सरकार से मांग की है कि छोटे किसानों के लिए पर्याप्त संख्या में मशीनरी उपलब्ध कराई जाए. इसके साथ ही पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को आर्थिक मदद भी दी जाए. किसानों का कहना है कि जो किसान पराली नहीं जलाता और उसका सही तरीके से प्रबंधन करता है, उसे प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए. किसानों के मुताबिक, अगर समय पर मशीनरी और आर्थिक सहायता मिले तो पराली जलाने की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.
फिरोजपुर जिले में पिछले साल पराली जलाने के करीब 556 मामले सामने आए थे. इस बार प्रशासन के सामने इन घटनाओं को कम करने के साथ ही जिले को जीरो बर्निंग की ओर ले जाने की चुनौती है. एक तरफ प्रशासन ने मशीनरी और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की मांग है कि उन्हें समय पर मशीनरी और आर्थिक मदद मिले. अब देखना होगा कि प्रशासन की तैयारियों और किसानों के सहयोग से इस साल फिरोजपुर में पराली जलाने की घटनाओं को कितनी हद तक रोका जा पाता है. (अक्षय कुमार का इनपुट)
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