
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऑफलाइन काम को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. विभाग ने साफ कहा है कि राजस्व से जुड़े सभी काम ऑनलाइन माध्यम से ही किए जाएंगे. किसी भी स्तर पर ऑफलाइन काम स्वीकार नहीं किया जाएगा. अगर राजस्व मामलों में ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि अधिकारियों को कानून और नियमों की जानकारी के साथ-साथ विभाग की ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल रिकॉर्ड की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए. अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में कौन सा डेटा उपलब्ध है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.
राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में नए नियुक्त अपर समाहर्ताओं और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है. इस दौरान अधिकारियों को राजस्व मामलों, ऑनलाइन सेवाओं और जमीन से जुड़े काम की जानकारी दी जा रही है. कार्यक्रम के शुरुआती सत्र में सचिव जय सिंह ने अधिकारियों को राजस्व न्यायालय चलाने, आदेश जारी करने, ऑनलाइन सेवाओं और अंचल स्तर पर काम की निगरानी को लेकर जरूरी निर्देश दिए.
सचिव जय सिंह ने कहा कि डीसीएलआर को अंचलों में आने वाले मामलों की अच्छी तरह से जांच करनी चाहिए. जिले में कई राजस्व मामलों में आदेश देने की जिम्मेदारी डीसीएलआर की होती है. इसलिए उन्हें मामलों की पूरी जानकारी रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में आदेश देने से पहले कोई परेशानी हो रही है तो अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह ले सकते हैं. उन्होंने अधिकारियों को राजस्व कानून और नियमों की जानकारी बढ़ाने के लिए लगातार पढ़ाई करने की सलाह दी. सचिव ने सभी नए अधिकारियों को अपने-अपने अंचलों में नियमित बैठक करने का भी निर्देश दिया. अधिकारियों को एक तय शेड्यूल बनाकर अंचल अधिकारी, अमीन और राजस्व कर्मचारियों के साथ बैठक करनी होगी.
जय सिंह ने कहा कि राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों का फिजिकल वेरिफिकेशन यानी मौके पर जाकर जांच की जाएगी. इसके लिए अधिकारियों को न्यायालयों में चल रहे मामलों, रिकॉर्ड और काम करने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी रखनी होगी. उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों को जल्दी निपटाने के लिए अधिकारियों को विभाग की ऑनलाइन सेवाओं और उनकी पूरी प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है. अधिकारियों को यह भी पता होना चाहिए कि विभाग के सिस्टम में कौन-कौन सा डेटा मौजूद है, उसे कहां से लिया जा सकता है और उसका सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.
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