
जिले में लगातार बारिश के बीच मनरेगा कार्यों में मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होने का मामला सामने आया है. 25 से 27 सितंबर के बीच तीन दिनों में जिले के 11 ब्लॉकों में कुल 1124 मजदूरों की उपस्थिति NMMS पोर्टल पर दर्ज की गई. इन मजदूरों की हाजिरी के आधार पर करीब 3.37 लाख रुपये की मजदूरी का मामला बताया जा रहा है. मामला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद अब इसकी जांच की जा रही है.
सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जिन दिनों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई, उस दौरान जिले में बारिश का दौर चल रहा था और कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित था. ऐसे में प्रशासन यह पता लगा रहा है कि पोर्टल पर दर्ज मजदूरों ने संबंधित काम के स्थान पर वास्तव में काम किया था या नहीं.
हालांकि, जांच पूरी होने तक पोर्टल पर दर्ज हाजिरी को फर्जी या अनियमित नहीं माना जा सकता. प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जमीनी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी.
NMMS पोर्टल के विवरण के मुताबिक, 25 सितंबर को आठ ब्लॉकों में 297 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई. इनमें मवई में सबसे ज्यादा 134 और रुदौली में 101 मजदूर दर्ज हुए.
इसके अलावा हरिंग्टनगंज में 27, मिल्कीपुर में 13, बीकापुर और तारुन में 8-8, सोहावल में 4 और मसौधा में 2 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई.
अगले दिन यानी 26 सितंबर को मजदूरों की संख्या काफी कम रही. इस दिन तीन ब्लॉकों में कुल 28 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज हुई. इनमें मवई में 21, मिल्कीपुर में 4 और बीकापुर में 3 मजदूर शामिल थे.
सबसे ज्यादा हाजिरी 27 सितंबर को दर्ज की गई. इस दिन 10 ब्लॉकों में कुल 799 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दिखाई गई. रुदौली में सर्वाधिक 254 मजदूर दर्ज हुए. इसके बाद अमानीगंज में 175 और मवई में 174 मजदूरों की उपस्थिति रही.
हरिंग्टनगंज में 62, पूराबाजार में 65, मिल्कीपुर में 42, सोहावल में 11, मसौधा में 8, तारुन में 7 और बीकापुर में एक मजदूर की हाजिरी दर्ज हुई.
इस तरह तीन दिनों के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या 1124 मजदूर होती है.
पोर्टल पर दर्ज मनरेगा कार्यों में मुख्य रूप से मिट्टी पटाई और पौधरोपण से जुड़े काम बताए गए हैं. लगातार बारिश के दौरान विशेष रूप से मिट्टी से संबंधित कार्यों की स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं.
मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के जरिए ऑनलाइन दर्ज की जाती है. अब प्रशासन पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड का जमीनी स्थिति से मिलान कर रहा है.
तीन दिन में दर्ज 1124 मजदूरों की हाजिरी के आधार पर करीब 3.37 लाख रुपये मजदूरी का मामला सामने आया है. प्रशासन अब भुगतान से पहले संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. संबंधित मास्टर रोल को शून्य किए जाने की कवायद की बात भी सामने आई है, ताकि किसी तरह की अनियमितता मिलने की स्थिति में गलत भुगतान न हो.
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है. उन्होंने बताया कि करीब 1100 श्रमिकों की हाजिरी और मानदेय से संबंधित विवरण सामने आया है.
CDO के मुताबिक यह पता लगाया जा रहा है कि जिस समय मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई, उस समय संबंधित स्थानों पर वास्तव में काम चल रहा था या नहीं. बारिश के समय काम नहीं होने के बावजूद किसी की हाजिरी दर्ज पाई जाती है तो वास्तविकता का आकलन करने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मजदूरों की संख्या रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है. जमीनी जांच पूरी होने के बाद ही श्रमिकों की सटीक संख्या और मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
अब प्रशासनिक जांच में NMMS पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति और कार्यस्थलों की वास्तविक स्थिति का मिलान अहम होगा. यदि दोनों में अंतर पाया जाता है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकती है.
फिलहाल प्रशासन ने किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच शुरू कर दी है. जांच के बाद ही साफ होगा कि बारिश के दौरान दर्ज 1124 मजदूरों की हाजिरी वास्तविक कार्य के अनुरूप थी या रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी हुई.(मयंक शुक्ला का इनपुट)