फरीदकोट में पराली प्रबंधन की तैयारी तेज, 3500 मशीनें बांटी गईं, ड्रोन से होगी निगरानी

फरीदकोट में पराली प्रबंधन की तैयारी तेज, 3500 मशीनें बांटी गईं, ड्रोन से होगी निगरानी

फरीदकोट में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. जिले में किसानों को 3500 से ज्यादा क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनें बांटी गई हैं और 171 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है. पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में 76 फीसदी की कमी दर्ज हुई थी.

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फरीदकोट में पराली प्रबंधन की तैयारी तेज, 3500 मशीनें बांटी गईं, ड्रोन से होगी निगरानीपराली प्रबंधन (सांकेतिक तस्‍वीर)

पंजाब के फरीदकोट जिले में धान की कटाई का सीजन शुरू होने के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा ने बताया कि इस साल जिले में करीब 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है. इनमें करीब 1.05 लाख हेक्टेयर सामान्य धान और 11 हजार हेक्टेयर बासमती का क्षेत्र है. कटाई के बाद करीब 7.45 लाख मीट्रिक टन पराली निकलने का अनुमान है.

3500 से ज्यादा मशीनें किसानों तक पहुंचीं

डीसी राहुल चाबा ने बताया कि पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था की है. अब तक किसानों को 3500 से ज्यादा क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं. इनमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर समेत दूसरी मशीनें शामिल हैं. ये मशीनें सहकारी समितियों, कस्टम हायरिंग सेंटरों और व्यक्तिगत किसानों के जरिए उपलब्ध कराई गई हैं.

2.23 लाख टन पराली के एक्स-सीटू प्रबंधन की व्यवस्था

जिले में पैदा होने वाली पराली में से करीब 2.23 लाख मीट्रिक टन के एक्स-सीटू प्रबंधन की व्यवस्था की गई है. इसके लिए एक बायोमास प्लांट, पांच पेपर प्लांट और तीन कार्डबोर्ड यूनिट उपलब्ध हैं. बाकी पराली को खेत में ही मिलाकर प्रबंधन करने पर जोर दिया जा रहा है.

बेलरों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी

जिला प्रशासन के मुताबिक, खेतों से पराली उठाने के लिए बेलरों की भी व्यवस्था की जा रही है. अमृतसर और कुछ अन्य जिलों में कटाई पहले शुरू होने के कारण फिलहाल बड़ी संख्या में बेलर वहां काम कर रहे हैं. 

फरीदकोट में 10 अक्टूबर के बाद कटाई तेज होने की संभावना है, जिसके बाद दूसरे जिलों से बेलर यहां पहुंचेंगे. पिछले साल पराली उठाने की दर करीब 175 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो इस साल बढ़कर 200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो गई है.

एक साल में 76 फीसदी घट गई आग की घटनाएं

फरीदकोट में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल बड़ी कमी दर्ज की गई. राहुल चाबा के अनुसार, 2024 में जिले में पराली जलाने की 551 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 136 रह गई. यानी एक साल में घटनाओं में करीब 76 फीसदी की कमी आई. प्रशासन का लक्ष्य इस साल भी आग की घटनाओं को और कम करना है.

पराली प्रबंधन की निगरानी के लिए जिले के गांवों में करीब 171 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं. प्रशासन ने उन गांवों पर विशेष निगरानी रखी है, जहां 2025 में चार या उससे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं. जैतो, कोटकपूरा, ढिलवां कलां और बिशनंदी को प्रमुख हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया है.

तीन ड्रोन से खेतों पर निगरानी

इस साल पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए तीन ड्रोन भी लगाए गए हैं. इनमें एक ड्रोन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के निर्देशों के अनुसार संचालित किया जाएगा, जबकि दो ड्रोन प्रमुख हॉटस्पॉट गांवों में निगरानी करेंगे. राजस्व और पुलिस विभाग के फील्ड स्टाफ को भी निगरानी व्यवस्था में लगाया गया है.

वहीं, किसान जसप्रीत सिंह ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ खेतों तक पराली उठाने वाले बेलर नहीं पहुंच पाते. कई किसानों के पास पराली को बेलर तक पहुंचाने के लिए जरूरी साधन भी नहीं होते. उनका कहना है कि ऐसे हालात में किसान पराली जलाने को मजबूर हो जाता है.

जसप्रीत सिंह ने कहा कि किसानों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समय पर पहुंचना चाहिए. उन्होंने गेहूं की कटाई के बाद किसानों के लिए सब्सिडी या आर्थिक सहायता देने, महंगे कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाने और कम दर पर डीजल उपलब्ध कराने की मांग की.

प्रशासन की किसानों से अपील

डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा ने किसानों से पराली नहीं जलाने और उपलब्ध मशीनरी और पराली प्रबंधन सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हवा की क्‍वालिटी प्रभावित होती है और इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. प्रशासन का लक्ष्य किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर पराली जलाने की घटनाओं में और कमी लाना है.

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