
कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 7,142.64 करोड़ रुपये की सूखा राहत देने की मांग की है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्रीय सूखा आकलन टीम के साथ बैठक के दौरान कहा कि प्रदेश के किसान और आम लोग सूखे के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार को NDRF के मानकों के अनुसार राज्य को उचित राहत उपलब्ध करानी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम के साथ सूखे की स्थिति को लेकर चर्चा की. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू के नेतृत्व में टीम राज्य में सूखे से हुए नुकसान का आकलन करने पहुंची है.
राज्य सरकार के मुताबिक, कर्नाटक के 240 तालुकों में से 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. वहीं, 177 घोषित तालुकों में सूखे के कारण कुल 46,324.50 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है.
शुरुआत में सरकार ने 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करते हुए केंद्र से 3,701 करोड़ रुपये की राहत मांगी थी. संशोधित घोषणा में शामिल 177 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए अब राहत की मांग बढ़ाकर 7,142.64 करोड़ रुपये कर दी गई है.
डीके शिवकुमार ने कहा कि सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा वैज्ञानिक आकलन के आधार पर और केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए की गई है. उन्होंने कहा कि अगर किसान संकट में होता है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है. इसलिए केंद्र सरकार को राज्य के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए.
उन्होंने राज्य में पानी की स्थिति पर भी चिंता जताई. उनके मुताबिक कृष्णा नदी बेसिन को छोड़कर राज्य के अन्य जलाशयों में पानी की आवक कम है. मलनाड और तटीय इलाकों में भी बारिश की कमी दर्ज की गई है. शहरी क्षेत्रों में भी पानी की समस्या सामने आ रही है.
राज्य सरकार की ओर से किसानों के लिए 2,500 रुपये की सहायता घोषित किए जाने की बात भी कही गई. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार से राज्य को अधिक सहयोग मिलेगा.
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के मंत्रियों ने अलग-अलग जिलों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया है. संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी एहतियाती और राहत उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं. किसानों को बुवाई को लेकर भी आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया है.
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों की ओर से अधिक कीमत की मांग और दुग्ध उत्पादकों की कीमत बढ़ाने की मांग का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना चाहिए.
केंद्रीय टीम के प्रमुख अजीत कुमार साहू ने कहा कि टीम तीन दिनों तक राज्य का दौरा कर जमीनी हालात का आकलन करेगी. इस दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों से आंकड़े और अन्य जानकारियां जुटाई जाएंगी. इसके बाद सूखे की वास्तविक स्थिति को लेकर एक डिटेल रिपोर्ट पेश की जाएगी.(नागार्जुन की रिपोर्ट)