चीन ने लौटाई ऑस्ट्रेलिया की मूंग, ग्लाइफोसेट अवशेषों ने मचाया हंगामा

चीन ने लौटाई ऑस्ट्रेलिया की मूंग, ग्लाइफोसेट अवशेषों ने मचाया हंगामा

चीन ने ऑस्ट्रेलिया की तीन मूंग की खेपों को ग्लाइफोसेट के अवशेष अधिक होने के कारण वापस लौटा दिया है. ऑस्ट्रेलियन मूंगबीन एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स हंट ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशकों का उपयोग लेबल के अनुसार करें. इससे देश की निर्यात छवि प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञ अब रसायन-मुक्त फसल सुखाने की तकनीक पर जोर दे रहे हैं.

चीन ने मूंग लौटाई, जेम्स हंट का किसानों को अलर्टचीन ने मूंग लौटाई, जेम्स हंट का किसानों को अलर्ट
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  • Noida,
  • Jul 25, 2026,
  • Updated Jul 25, 2026, 5:03 PM IST

ऑस्ट्रेलिया से चीन भेजी गई मूंग (Mungbean) की तीन खेपों को चीन ने वापस कर दिया है. इसकी वजह मूंग में कीटनाशक ग्लाइफोसेट (Glyphosate) के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए जाना है. चीन में आयात होने वाले खाद्यान्न के लिए अधिकतम अवशेष सीमा (Maximum Residue Limit-MRL) का पालन करना अनिवार्य होता है. जांच में यह पाया गया कि इन खेपों में ग्लाइफोसेट की मात्रा चीन के तय मानकों से काफी ज्यादा थी. इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई मूंग उद्योग में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि चीन इस फसल का सबसे बड़ा खरीदार है.

किसानों से नियमों का पालन करने की अपील

ऑस्ट्रेलियन मूंगबीन एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स हंट ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशकों का इस्तेमाल हमेशा लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार करें. उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया की पहचान दुनिया में अच्छी गुणवत्ता वाली मूंग के लिए है. यदि बार-बार ऐसी घटनाएं होती रहीं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की साख को नुकसान पहुंचेगा और निर्यात करना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि कुछ किसानों की लापरवाही पूरे उद्योग को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए फसल बेचते समय सही जानकारी देना और कीटनाशकों का जिम्मेदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी है.

ऑस्ट्रेलिया की सीमा से भी कई गुना अधिक मिला अवशेष

जेम्स हंट के अनुसार, जिन खेपों को चीन ने अस्वीकार किया, उनमें ग्लाइफोसेट का स्तर केवल चीन के मानकों से ही अधिक नहीं था, बल्कि कुछ मामलों में यह ऑस्ट्रेलिया के घरेलू मानकों से भी ऊपर पाया गया. उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में ग्लाइफोसेट की जो अधिकतम सीमा तय है, वह चीन द्वारा अपनाए गए अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स (Codex) मानकों से लगभग पांच गुना अधिक है. इसके बावजूद कुछ खेपें ऑस्ट्रेलियाई सीमा भी पार कर गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया.

कटाई से पहले गलत तरीके से दवा का इस्तेमाल बना वजह

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या फसल की कटाई से पहले गलत समय पर ग्लाइफोसेट के उपयोग के कारण हुई है. कई किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए कटाई से पहले इस रसायन का छिड़काव कर देते हैं. यदि यह काम सही समय और निर्धारित मात्रा में नहीं किया जाए तो दवा के अवशेष दानों में रह जाते हैं. यही अवशेष बाद में निर्यात के दौरान जांच में पकड़ में आते हैं.

जेम्स हंट ने कहा कि उद्योग की ओर से किसानों को पहले ही यह जानकारी दी जाती रही है कि कब और कैसे फसल को सुरक्षित तरीके से सुखाया जाए. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि यदि मौसम खराब हो या बारिश की संभावना हो, तब भी जल्दबाजी करने के बजाय नियमों का पालन करें.

रसायनों के बिना फसल सुखाने के तरीके पर हो रहा काम

उन्होंने बताया कि भविष्य में रसायनों पर निर्भरता कम करने के लिए वैज्ञानिक वैकल्पिक तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं. इनमें स्वाथिंग (Swathing) जैसी तकनीक शामिल है, जिसमें फसल को काटकर व्यवस्थित तरीके से सुखाया जाता है. शुरुआती शोध में यह तरीका काफी सफल माना गया है. कई परीक्षणों में यह पाया गया कि इस तकनीक से फसल ग्लाइफोसेट के उपयोग की तुलना में जल्दी सूख गई और रसायनों के इस्तेमाल की जरूरत भी कम हुई.

निर्यातकों के लिए बढ़ी मुश्किलें

चीन ऑस्ट्रेलियाई मूंग का सबसे बड़ा आयातक है. ऐसे में यदि कोई खेप वहां अस्वीकार हो जाती है तो निर्यातकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है. उत्पाद को वापस ऑस्ट्रेलिया लाना आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता. ऐसे में निर्यातकों को मजबूरी में इसे मलेशिया या सिंगापुर जैसे अन्य देशों में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. जेम्स हंट ने बताया कि मूंग का व्यापार कंटेनरों के जरिए होता है, लेकिन यदि किसी एक कंटेनर की जांच में समस्या मिलती है तो कई बार पूरी खेप को ही अस्वीकार कर दिया जाता है. इससे निर्यातकों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है.

किसानों की जिम्मेदारी से ही बचेगी बाजार में साख

ऑस्ट्रेलियाई मूंग उद्योग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग भी मजबूत बनी हुई है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों ने कीटनाशकों के उपयोग और गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया तो इससे पूरे उद्योग को नुकसान हो सकता है. उनका मानना है कि नियमों का पालन करके ही ऑस्ट्रेलिया अपनी अच्छी गुणवत्ता की पहचान बनाए रख सकता है और चीन जैसे बड़े बाजारों में अपनी मजबूत स्थिति कायम रख सकता है.

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