चार गुना मुआवजे के दावे पर सवाल, झांसी के किसान सड़कों पर उतरने को तैयार

चार गुना मुआवजे के दावे पर सवाल, झांसी के किसान सड़कों पर उतरने को तैयार

झांसी के खिरियापाली और आसपास के क्षेत्रों में बुंदेलखंड लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी नाराज़गी है. किसानों का कहना है कि सर्किल रेट पुराने हैं और मुआवज़ा असली बाजार दर के मुकाबले बहुत कम है. किसान न्याय की मांग कर रहे हैं और जमीन बचाने के लिए मुख्यमंत्री तक जाने को तैयार हैं.

झांसी में किसानों का विरोध तेजझांसी में किसानों का विरोध तेज
क‍िसान तक
  • Jhansi,
  • Feb 10, 2026,
  • Updated Feb 10, 2026, 12:22 PM IST

बुंदेलखंड लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत झांसी जिले के ग्राम खिरियापाली और आसपास के इलाकों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी हो रही है. इसको लेकर किसानों में बहुत ज्यादा नाराजगी है. किसानों का कहना है कि सरकार अखबारों में चार गुना मुआवज़ा देने की बात कर रही है, लेकिन असल में बहुत पुराने सर्किल रेट पर उनकी उपजाऊ जमीन ली जा रही है. किसानों का कहना है कि उनकी यही जमीन उनके जीवन का सहारा है और कम मुआवज़े में वे न तो नई जमीन खरीद पाएंगे और न ही अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर पाएंगे.

खेती ही जीवन का आधार

ग्राम खिरियापाली के किसानों ने मिलकर इस जमीन अधिग्रहण पर आपत्ति दर्ज कराई है. किसानों का कहना है कि उनकी पूरी आजीविका खेती पर ही निर्भर है. यही जमीन उन्हें खाने-पीने और परिवार पालने का सहारा देती है. अगर यह जमीन चली गई तो उनके पास कमाने का कोई और साधन नहीं बचेगा. किसानों को डर है कि जमीन जाने के बाद उनका जीवन बहुत मुश्किल हो जाएगा.

किसान दीपक यादव की बात

किसान दीपक यादव ने बताया कि उनकी उपजाऊ खेती की जमीन इस परियोजना में ली जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार करीब 44 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जमीन ले रही है, जबकि स्थानीय बाजार में एक एकड़ जमीन की कीमत ही लगभग 44 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है. ऐसे में सरकार जो मुआवज़ा दे रही है, वह बाजार कीमत के मुकाबले बहुत कम है और इससे किसानों को नुकसान होगा.

सर्किल रेट को लेकर बड़ा सवाल

किसानों का कहना है कि इस इलाके का सर्किल रेट पिछले 25 साल से ठीक तरह से नहीं बदला गया है. हाल में थोड़ा बहुत बढ़ाया गया है, लेकिन वह भी जमीन की असली कीमत से बहुत कम है. खिरियापाली की जमीन झांसी विकास प्राधिकरण और बीड़ा क्षेत्र के पास है, जहां जमीन के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं. इसके बावजूद सरकार 11 से 17 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर या ज्यादा से ज्यादा 44 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के आसपास ही मुआवज़ा तय कर रही है, जिसे किसान गलत मान रहे हैं.

जमीन के दाम और मुआवज़े में बड़ा अंतर

किसान रोहित मिश्रा ने कहा कि वे किसी भी हालत में अपनी जमीन नहीं देंगे. उन्होंने बताया कि जमीन का असली बाजार मूल्य 50 से 60 लाख रुपये प्रति बीघा तक है, जबकि सरकार 14 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर जैसी दरों की बात कर रही है. इस बड़े अंतर की वजह से किसानों में बहुत गुस्सा है. किसानों ने कहा है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे मिलकर आंदोलन करेंगे और जबरन काम शुरू हुआ तो कड़ा कदम उठाएंगे.

अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक जाने की तैयारी

किसान विजय कुमार ने बताया कि उन्होंने पहले एसडीएम से मिलकर अपनी परेशानी बताई और फिर जिलाधिकारी से भी मिले. उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे. उन्होंने साफ कहा कि किसान विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपनी रोज़ी-रोटी खोकर विकास को स्वीकार नहीं कर सकते.

भाजपा नेता ने भी किसानों का साथ दिया

किसानों के साथ पहुंचे भाजपा जिला महामंत्री छत्रपाल सिंह राजपूत ने भी कहा कि मौजूदा सर्किल रेट सही नहीं है. उन्होंने बताया कि बीड़ा क्षेत्र के पास होने की वजह से जमीन के दाम बहुत बढ़ चुके हैं, लेकिन सरकारी दरें सच्चाई नहीं दिखातीं. उन्होंने कहा कि किसान इस मुआवज़े पर जमीन देने को तैयार नहीं हैं और सरकार को सर्किल रेट पर फिर से विचार करना चाहिए.

तय समय में दर्ज कराई गई आपत्ति

किसानों ने सरकार द्वारा दी गई 10 दिन की अवधि के अंदर अपनी आपत्तियां दर्ज करा दी हैं. किसानों की मांग है कि या तो सर्किल रेट को सही बाजार कीमत के अनुसार बदला जाए या फिर इतना मुआवज़ा दिया जाए, जिससे वे उतनी ही कीमत की दूसरी जमीन खरीद सकें और अपनी आजीविका बचा सकें.

विकास या किसान का भविष्य

बुंदेलखंड लिंक एक्सप्रेसवे को क्षेत्र के विकास के लिए बहुत जरूरी परियोजना बताया जा रहा है, लेकिन किसानों का सवाल है कि क्या विकास की कीमत उनकी जमीन और उनका भविष्य होगा. किसानों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन किसान को नुकसान पहुंचाकर किया गया विकास सही नहीं है. (अजय झा का इनपुट)

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