
पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने ग्रामीण रोजगार को लेकर बड़ा फैसला लिया है. जिस विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना का सरकार कुछ महीने पहले तक खुलकर विरोध कर रही थी, अब उसी योजना को राज्य में लागू करने की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर दी गई है. सरकार के इस फैसले के बाद यह योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे पंजाब में लागू हो जाएगी. इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है और विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है.
VB-G RAM G यानी विकसित भारत-गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) केंद्र सरकार की एक ग्रामीण रोजगार योजना है. इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले उन परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल (Unskilled) मजदूरी करना चाहते हैं. इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा, लोगों की आय में सुधार होगा और गांवों का विकास तेजी से होगा.
पंजाब सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने 26 जून को इस योजना का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया. अधिसूचना में कहा गया है कि पंजाब सरकार "विकसित भारत 2047" के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने के लिए यह योजना लागू कर रही है. सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार मिलेगा और गांवों में विकास से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा.
सबसे बड़ी बात यह है कि पंजाब सरकार का यह फैसला उसके पुराने रुख से बिल्कुल अलग है. दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इस योजना का विरोध करने के लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया था. उस समय विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के इस कानून का विरोध किया था.
सरकार का आरोप था कि केंद्र सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को कमजोर करने और गरीबों तथा दलित मजदूरों के रोजगार के अधिकार को खत्म करने की कोशिश की है. विधानसभा ने केंद्र सरकार से मनरेगा को पहले की तरह अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल करने की मांग भी की थी.
अब जब वही सरकार इस योजना को लागू कर रही है तो राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं. हालांकि पंजाब सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसने अपना फैसला क्यों बदला, लेकिन नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह कदम ग्रामीण विकास को मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उठाया गया है.
सरकार का कहना है कि नई योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे और गांवों में विकास कार्यों को गति मिलेगी.
पंजाब कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सवाल उठाया कि जिस योजना का कुछ महीने पहले विधानसभा में विरोध किया गया था, उसे अब अचानक लागू करने की क्या वजह है.
उन्होंने कहा कि इस फैसले का समय भी काफी अहम है और कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले का संबंध मुख्यमंत्री से जुड़े हालिया विवादों से है या फिर केंद्र सरकार के साथ किसी समझौते के तहत यह निर्णय लिया गया है.
पंजाब सरकार के इस यू-टर्न के बाद राज्य में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है. एक तरफ सरकार का कहना है कि नई योजना ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए फायदेमंद होगी, वहीं विपक्ष इसे सरकार के बदलते रुख और राजनीतिक मजबूरी से जोड़कर देख रहा है.
अब 1 जुलाई से योजना लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इससे ग्रामीण परिवारों को कितना लाभ मिलता है और पंजाब सरकार इस योजना को किस तरह जमीन पर लागू करती है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.
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