
बिहार के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने दरभंगा और मधुबनी जिलों को शामिल करते हुए मिथिला मल्टी-कमोडिटी हॉर्टिकल्चर क्लस्टर को मंजूरी दे दी है. यह क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (CDP) 2021 के तहत लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत वाला एकीकृत परियोजना है, जो बिहार के बागवानी उत्पादों को नई ऊंचाई देने वाली साबित होगी.
यह क्लस्टर लगभग 15,100 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगा और करीब 19,200 किसानों को सीधा लाभ पहुंचाएगा. मुख्य फसलें केला और आम हैं, जबकि लीची और मखाना को अतिरिक्त फसलों के रूप में शामिल किया गया है. परियोजना में उत्पादन बढ़ाने से लेकर खरीद और निर्यात तक की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की योजना है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस मंजूरी को बिहार के बागवानी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.
इस मेगा प्रोजेक्ट में कुल 98.80 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इसमें प्री-प्रोडक्शन और प्रोडक्शन सपोर्ट के लिए 38.4 करोड़, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और वैल्यू एडिशन के लिए 42.5 करोड़ और लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए 17.9 करोड़ रुपये रखे गए हैं. प्रमुख सुविधाओं में हाई-टेक नर्सरी, टिश्यू कल्चर लैब, प्लांट हेल्थ क्लिनिक, ड्रिप इरिगेशन विस्तार, हाई डेंसिटी प्लांटिंग, 26 इंटीग्रेटेड पैक हाउस, 4,500 मीट्रिक टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चैंबर, रीफर वाहन और डिजिटल मार्केटिंग शामिल हैं. 'नॉर्थ बिहार फ्रूट बास्केट' ब्रांड के तहत इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाई जाएगी.
यह परियोजना छोटे किसानों, महिलाओं, युवा उद्यमियों और FPO को विशेष रूप से मजबूत करेगी. बेहतर नर्सरी, आधुनिक सिंचाई, कोल्ड चेन और डिजिटल मार्केटिंग से उत्पादन बढ़ेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी. इससे किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही बिहार हॉर्टिकल्चर मिशन अब NHB के साथ MoA पर हस्ताक्षर कर इंप्लीमेंटिंग एजेंसी के चयन के लिए RFP जारी करेगा. यह परियोजना बिहार को बागवानी निर्यात में मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.