किसानों ने अपनाई आधुनिक तकनीकप्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का पवित्र संगम है. इसी संगम की रेत पर हर साल माघ मेला लगता है. इस मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं. इस बार माघ मेले में किसानों के लिए एक बहुत ही खास कार्यक्रम रखा गया, जिसे विराट किसान मेला कहा गया है. यह मेला प्रयागराज के सेक्टर-3 में गंगा पंडाल के अंदर लगाया गया. यह आयोजन पूरे पांच दिनों तक चला, जिसमें देश और प्रदेश से लगभग 650 किसान उत्साह के साथ शामिल हुए.
यह किसान मेला केवल देखने का नहीं, बल्कि सीखने का भी बड़ा मौका था. इस मेले में खेती से जुड़े कई बड़े जानकार लोग आए. कृषि विभाग के अधिकारी, खेती के विशेषज्ञ और अलग-अलग कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी यहाँ मौजूद थे. इन सभी लोगों ने किसानों को खेती से जुड़ी नई बातें समझाईं. किसानों ने अपने सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने उन्हें बहुत ही सरल भाषा में जवाब दिए. इससे किसानों को खेती के बारे में सही जानकारी मिली.
मेले में खेती से जुड़ी बहुत सी नई चीजें दिखाई गईं. यहाँ अच्छे बीज, खाद और फसल की दवाइयों का प्रदर्शन किया गया. इसके साथ ही सोलर पंप, ड्रोन और नए-नए कृषि यंत्र भी दिखाए गए. किसानों ने इन चीजों को देखा और समझा कि आज की खेती पहले से कितनी आसान हो गई है. मशीनों की मदद से अब खेती कम समय में और कम मेहनत में की जा सकती है.
इस विराट किसान मेले में 40 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए थे. इन स्टॉलों पर किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ ने अपने बनाए हुए उत्पाद रखे थे. डेयरी विभाग और उद्यान विभाग के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने. यहाँ दूध से बनी चीजें, फल, सब्जियाँ और दूसरे किसान उत्पाद देखने को मिले. कार्यक्रम में आए खास मेहमानों ने इन स्टॉलों का दौरा किया और किसानों से बात की. इससे किसानों का आत्मविश्वास और बढ़ा.
मेले में किसानों को ऑर्गेनिक खेती के बारे में भी बताया गया. उन्हें समझाया गया कि बिना ज़हरीली दवाइयों के खेती कैसे की जा सकती है. इसके साथ ही फसल सुधार की नई तकनीकों पर चर्चा हुई. किसानों को यह भी बताया गया कि वे अपनी फसल को बाज़ार में अच्छे दाम पर कैसे बेच सकते हैं. इन सभी जानकारियों से किसानों को खेती को लाभ का काम बनाने की सीख मिली.
इस किसान मेले में भाग लेकर किसान बहुत खुश और संतुष्ट नजर आए. उन्होंने कहा कि उन्हें यहाँ आकर बहुत कुछ नया सीखने को मिला. संगम की पवित्र भूमि पर लगा यह मेला किसानों के लिए यादगार बन गया. इस आयोजन ने किसानों को नई तकनीक के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और खेती में एक नई दिशा दिखाई. (आनंद राज का इनपुट)
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