
भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उन्होंने वाहनों में 100 प्रतिशत इथेनॉल के इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि कभी जब वह इथेनॉल को लेकर अपनी योजना बताते थे तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब यह ईंधन पेट्रोल का एक मजबूत विकल्प बन सकता है. नितिन गडकरी ने बताया कि नए नियमों के जरिए देश में E85 (85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिश्रण) और E100 जैसे ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा बी100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा.
सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना और देश में स्वदेशी ईंधनों को बढ़ावा देना है. इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है. इससे किसानों को भी अतिरिक्त बाजार मिलने की उम्मीद है. गडकरी ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर मारुति सुजुकी इंडिया की लोकप्रिय कार वैगनआर का 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित मॉडल लॉन्च किया है. उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब इथेनॉल आधारित वाहनों पर तेजी से काम कर रही हैं. आने वाले डेढ़ महीने में टोयोटा, सुजुकी, MG Motor India और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां इथेनॉल अनुकूल वाहन लॉन्च कर सकती हैं. इससे पहले हीरो मोटोकॉर्प ने भी E85 ईंधन से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं.
नितिन गडकरी ने कहा कि नागपुर में जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिसमें हाइड्रोजन पंप और हाइड्रोजन से चलने वाली दो बसें शामिल होंगी. उन्होंने बताया कि ये बसें पानी से तैयार किए गए ग्रीन हाइड्रोजन से चलेंगी. उन्होंने कहा कि आने वाला समय वैकल्पिक ऊर्जा का है और भारत को प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के नए स्रोतों को अपनाने की जरूरत है.
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी हाल ही में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि E85 ईंधन, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होगा, मौजूदा E20 ईंधन की तुलना में सस्ता हो सकता है. सरकार E85 ईंधन को तेजी से अपनाने के लिए नीतियों पर काम कर रही है. अगर 2026-27 में केवल 1 प्रतिशत E85 ईंधन का इस्तेमाल भी शुरू होता है, तो इससे करीब 4 करोड़ लीटर इथेनॉल की मांग पैदा हो सकती है.
कुछ लोगों ने इथेनॉल के ज्यादा इस्तेमाल से वाहनों के इंजन और प्रदर्शन पर असर को लेकर चिंता जताई है. हालांकि, गडकरी ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इथेनॉल एक खराब ईंधन नहीं है और इसके इंजीनियरिंग मानक पेट्रोलियम ईंधन के बराबर हैं. उन्होंने कहा कि इथेनॉल को अपनाने से देश के किसानों को फायदा मिलेगा, प्रदूषण कम होगा और देश की पेट्रोल आयात पर निर्भरता घटेगी. सरकार की यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर ईंधन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में इथेनॉल आधारित वाहनों की संख्या बढ़ने से परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.