
गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में खेतों से गुजरने वाली बिजली लाइनों के मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है. सरकार की ओर से प्राइवेट कंपनी द्वारा खेतों में बिजली की लाइनें बिछाने के लिए मुआवजे से जुड़ा नया सर्कुलर जारी किया गया है, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं. किसानों का कहना है कि नई नीति में उनके हितों का पूरा ध्यान नहीं रखा गया है. इसी के विरोध में सुरेंद्रनगर और आसपास के गांवों के किसानों ने बड़ी रैली निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा.
बुधवार को सुरेंद्रनगर के मेला ग्राउंड से कलेक्टर कार्यालय तक किसानों ने पैदल रैली निकाली. इस रैली में सुरेंद्रनगर जिले के अलावा ध्रांगधरा तालुका के कोंध गांव, मोरबी और आसपास के कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया.
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां भी शामिल हुईं. उन्होंने भी किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर रैली में हिस्सा लिया और अपनी आवाज बुलंद की.
किसानों का कहना है कि प्राइवेट कंपनी उनके खेतों से बिजली की लाइनें बिछा रही है. इसके बदले सरकार ने मुआवजे को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है, लेकिन यह किसानों के लिए न्यायसंगत नहीं है. उनका आरोप है कि नई मुआवजा नीति से ज्यादा फायदा कंपनी को होगा, जबकि किसानों को उनकी जमीन और फसल के नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा.
किसानों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित की बात करती है, तो उसे ऐसा सर्कुलर जारी करना चाहिए जिससे किसानों को पूरा और उचित मुआवजा मिल सके.
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मांग की कि गुजरात में भी दूसरे राज्यों की तरह खेतों में बिजली की लाइन बिछाने पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाए. उनका कहना है कि जब दूसरे राज्यों में किसानों को बेहतर मुआवजा मिल सकता है तो गुजरात के किसानों को भी वही सुविधा मिलनी चाहिए.
किसानों ने यह भी कहा कि अगर सरकार उचित मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है, तो शहरों की तरह गांवों में भी बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाए. ऐसा होने पर किसानों की जमीन को नुकसान नहीं होगा और मुआवजे का विवाद भी खत्म हो जाएगा.
रैली के बाद किसानों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उन्होंने सरकार से नए सर्कुलर पर दोबारा विचार करने और किसानों के हित में नई नीति बनाने की मांग की.
किसानों ने साफ कहा कि मौजूदा सर्कुलर उन्हें किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है. उनका कहना है कि सरकार को निजी कंपनियों के बजाय किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए.
इस आंदोलन में महिलाओं और युवतियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली. उन्होंने किसानों के साथ रैली में हिस्सा लिया और कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और मजबूत बना दिया.
किसानों ने सरकार को चेतावनी भी दी है. उनका कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो राज्य के 200 से अधिक गांवों में किसानों को जागरूक किया जाएगा. इसके बाद गुजरात की राजधानी गांधीनगर और देश की राजधानी दिल्ली में भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
किसानों का कहना है कि यह लड़ाई केवल सुरेंद्रनगर की नहीं, बल्कि उन सभी किसानों की है जिनकी जमीन से बिजली की लाइनें गुजर रही हैं. इसलिए आने वाले समय में इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि खेतों में बिजली की लाइन बिछाने से होने वाले नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए. उनका कहना है कि नई मुआवजा नीति में बदलाव कर किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही, अगर उचित मुआवजा देना संभव नहीं है तो बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाए, ताकि किसानों की खेती और जमीन सुरक्षित रह सके. (साजिदभाई बेलिम का इनपुट)
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