गांव, खेत और किसान ही हैं विकसित भारत की असली नींव: ओम बिरला

गांव, खेत और किसान ही हैं विकसित भारत की असली नींव: ओम बिरला

टिकाऊ खेती भारत को 2047 तक विकसित बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी. ओम बिरला ने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक कृषि से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. खेती केवल व्यवसाय नहीं बल्कि देश की संस्कृति है, जो भारत के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनेगी.

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गांव, खेत और किसान ही हैं विकसित भारत की असली नींव: ओम बिरलाटिकाऊ खेती से बदलेगा भारत का भविष्य

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा खेतों, गांवों और किसानों से होकर गुजरती है. उनका कहना है कि कृषि केवल एक काम नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति और जीवन का अहम हिस्सा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत को आगे बढ़ना है तो खेती को टिकाऊ, आधुनिक और वैज्ञानिक बनाना बहुत जरूरी है. खेती को मजबूत बनाकर ही देश में भोजन सुरक्षा, ग्रामीण विकास और समृद्धि लाई जा सकती है.

नई सोच और तकनीक से बदलेगी खेती

ओम बिरला ने बताया कि अब खेती को पुराने तरीकों के साथ-साथ नई तकनीक से जोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि अगर पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को साथ मिलाया जाए तो कृषि क्षेत्र और मजबूत बन सकता है. आज के समय में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस और डिजिटल खेती जैसी तकनीकें किसानों की मदद कर रही हैं. इन तकनीकों से खेती ज्यादा आसान, तेज और लाभदायक बन सकती है.

जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती

उन्होंने यह भी कहा कि आज खेती के सामने जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती बन गया है. मौसम का बदलता व्यवहार, बारिश की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाएं किसानों को प्रभावित कर रही हैं. इसलिए जरूरी है कि वैज्ञानिक और शोध आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाए. नई तकनीक और शोध से ऐसे बीज और तरीके विकसित किए जा सकते हैं जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें.

कृषि संस्थानों और वैज्ञानिकों की भूमिका

ओम बिरला ने कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और नवाचार करने वालों को देश की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों की मेहनत से नई तकनीकें और समाधान सामने आते हैं, जो किसानों की मदद करते हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संस्थान लगातार ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं, जो खेती को टिकाऊ और लाभदायक बना रही हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

उन्होंने कहा कि खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी बढ़ावा देना जरूरी है. इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा. अगर किसान केवल फसल उगाने तक सीमित न रहकर उसे प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंचाने में भी शामिल हों, तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.

पानी और मिट्टी की बचत जरूरी

ओम बिरला ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि पानी की बचत, ड्रिप इरिगेशन, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और संतुलित खाद का उपयोग आज की सबसे बड़ी जरूरत है. अगर हम प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करेंगे तो खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहेगी. इसके साथ ही जलवायु के अनुसार फसलों का चयन भी बहुत महत्वपूर्ण है.

युवाओं और महिलाओं की भूमिका

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास में युवाओं और महिलाओं की भूमिका बहुत अहम है. आज कई युवा नई तकनीक और स्टार्टअप के जरिए खेती में बदलाव ला रहे हैं. महिलाएं भी कृषि कार्यों में बड़ी भागीदारी निभा रही हैं. अगर इन सभी को सही दिशा और अवसर मिले तो कृषि क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन संभव है.

मिलकर बनेगा विकसित भारत 2047

ओम बिरला ने कहा कि “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का साझा सपना है. इसमें किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, नीति निर्माता और समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है. जब सभी मिलकर काम करेंगे तभी भारत एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित देश बन सकेगा.

कुल मिलाकर, ओम बिरला का संदेश यह है कि भारत का भविष्य उसकी खेती और किसानों की ताकत पर निर्भर करता है. यदि खेती को आधुनिक तकनीक, शोध और टिकाऊ तरीकों से जोड़ा जाए तो किसान मजबूत होंगे और देश तेजी से विकास करेगा. टिकाऊ कृषि ही विकसित भारत 2047 की सबसे मजबूत नींव साबित होगी.

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