
किसानों की उगाई गई उपज मंडी-हाटों के अलावा ऑनलाइन बिके, इसके लिए सरकार ने ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. यह प्लेटफॉर्म किसानों को बोलियों के जरिये अपनी उपज बेचने और हाथोंहाथ पैसे पाने की सुविधा देता है. इस प्लेटफॉर्म के शुरू होने से किसान अपने आसपास के बाजार और मंडियों में उपज बेचने के अलावा दूसरे राज्यों के व्यापारियों को भी बिक्री कर सकते हैं. इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसानों को अपनी उपज के लिए मोलभाव करने का भी मौका मिलता है. ई-नाम की सुविधा शुरू होने के बाद किसान घर बैठे दूर-दराज के किसी राज्य और कोने में भी अपनी उपज को सही रेट पर बेच सकते हैं, और खाते में ऑनलाइन पैसे पा सकते हैं. मंगलवार को सरकार ने ई-नाम प्लेटफॉर्म के बारे में कुछ अहम जानकारी दी.
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में किसानों और व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर अभी किसानों की तुलना में व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन की तादाद बहुत कम है. कृषि राज्य मंत्री के मुताबिक, 30 जून, 2026 तक, ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारी रजिस्टर्ड हैं.
हालांकि, इसमें एक बड़ी जानकारी ये निकल कर सामने आई कि किसानों की तुलना में व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन भले कम हो, लेकिन बीते छह साल में कृषि उपज की खरीद में तकरीबन छह गुना की वृद्धि दर्ज की गई है. सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के जरिए राज्यों के बीच होने वाला व्यापार तेजी से बढ़ा है. 2018-19 में जहां यह व्यापार सिर्फ 563 मीट्रिक टन (मूल्य 37 लाख रुपये) था. वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2,984.3 मीट्रिक टन (मूल्य 14.28 करोड़ रुपये) हो गया है. कुल व्यापार की बात करें तो अब तक राज्यों के बीच कुल 28,566 मीट्रिक टन और 83.95 करोड़ रुपये का व्यापार हो चुका है.
कृषि राज्य मंत्री ने संसद को बताया, भारत सरकार ने कृषि मार्केटिंग व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) पोर्टल शुरू किया है, जो देशभर की कृषि उपज मंडियों (एपीएमसी) को एक डिजिटल मंच पर जोड़ता है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को ऑनलाइन बोली, बेहतर मूल्य खोजने और बिक्री राशि का सीधे बैंक खाते में भुगतान जैसी सुविधाएं मिलती हैं. साथ ही, देश के अलग-अलग राज्यों के खरीदार भी ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में भाग लेकर अंतर-राज्यीय कृषि व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं.
किसानों की सामूहिक ताकत बढ़ाने के मकसद से केंद्र सरकार की 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाने और उसे बढ़ाने की योजना के तहत देशभर में 10,000 एफपीओ का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है. ये संगठन किसानों की उपज को एक जगह जुटाकर उन्हें बड़े स्तर पर मार्केटिंग का लाभ दिलाने के साथ-साथ उनकी सौदेबाजी क्षमता को मजबूत बनाते हैं. साल 2020 में योजना की शुरुआत के बाद से एफपीओ का कुल कारोबार 20,340 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है.
फसल कटाई के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करने और भंडारण, लॉजिस्टिक्स और दाम बढ़ाने की सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार कई योजनाओं के माध्यम से निवेश कर रही है. कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) योजना के तहत पिछले दस साल में 369.18 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाली 12,353 भंडारण परियोजनाओं और 6,901 अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.
कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के बारे में कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि इसके तहत देश में किसानों और व्यापारियों की मदद के लिए 18,893 गोदाम, 3,110 कोल्ड स्टोरेज (शीतगृह) और 2,105 फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (फसलों को प्रोसेस करने वाली इकाइयां) बनाने के लिए सस्ते ब्याज पर लोन (ब्याज अनुदान) दिया गया है.
बागवानी विकास मिशन (MIDH) के बारे में उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत फल और सब्जियों के रख-रखाव के लिए लगभग 1.76 लाख आधुनिक सुविधाएं तैयार की गई हैं. इनमें पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, ठंडी हवा देने वाली गाड़ियां (रेफ्रिजरेटेड वैन), फल पकाने वाले चैंबर (राइपनिंग चैंबर) और फसल को ठंडा करने वाले औजार शामिल हैं. राज्य मंत्री ने कहा कि किसानों की फसल खराब न हो और उन्हें सही दाम मिल सके, इसके लिए सरकार ने देश भर में लाखों गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स तैयार करने में मदद की है.