Pearl Farming से बदल रही किसानों की किस्मत, गांवों में खुल रहे कमाई के नए रास्ते

Pearl Farming से बदल रही किसानों की किस्मत, गांवों में खुल रहे कमाई के नए रास्ते

मोती की खेती भारत में किसानों और युवाओं के लिए नई कमाई का साधन बनकर उभर रही है. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में किसान जलभराव वाली जमीन का उपयोग कर इसे अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. कम जगह और कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर प्रदान कर रहा है.

मोती की खेतीमोती की खेती
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 03, 2026,
  • Updated Jun 03, 2026, 3:14 PM IST

भारत में खेती को हमेशा अनाज, सब्जियों और फलों से जोड़कर देखा जाता रहा है. लेकिन अब समय बदल रहा है. किसान नई-नई तकनीकों और नए व्यवसायों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इन्हीं नए विकल्पों में से एक है मोती की खेती. जो काम कभी सिर्फ समुद्र और तटीय इलाकों तक सीमित माना जाता था, वह अब छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच चुका है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मोती की खेती किसानों और युवाओं के लिए कमाई का नया जरिया बनकर उभर रही है. यहां कई किसान अपने खेतों और तालाबों का इस्तेमाल करके मोती तैयार कर रहे हैं और अच्छी आय कमा रहे हैं.

पानी से भरी जमीन बनी अवसर

मुरादाबाद के किसान डॉ. दीपक मेहरोत्रा की कहानी इस बदलाव का सबसे अच्छा उदाहरण है. उनकी जमीन निचले इलाके में थी, जहां अक्सर पानी भर जाता था. आसपास के ऊंचे खेतों का पानी भी उनके खेत में आ जाता था. ऐसे में सामान्य खेती करना मुश्किल हो गया था.

लगातार आने वाली इस परेशानी ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया. उन्होंने मोती की खेती के बारे में जानकारी जुटाई और इस क्षेत्र का अध्ययन किया. इसी दौरान उन्हें पता चला कि भारत अपनी जरूरत के केवल 3 प्रतिशत मोती ही खुद तैयार करता है, जबकि लगभग 97 प्रतिशत मोती दूसरे देशों से आयात किए जाते हैं.

यहीं से उन्हें इस व्यवसाय में बड़ा अवसर दिखाई दिया और उन्होंने मोती की खेती शुरू करने का फैसला किया.

आखिर कैसे होती है मोती की खेती?

मोती की खेती सुनने में जितनी अलग लगती है, इसकी प्रक्रिया भी उतनी ही रोचक है. इसके लिए सीप (ऑयस्टर) का उपयोग किया जाता है. एक विशेष प्रक्रिया के जरिए सीप के अंदर एक छोटा सा केंद्र या न्यूक्लियस डाला जाता है. इसके बाद इन सीपों को तालाबों में नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है.

धीरे-धीरे समय के साथ सीप के अंदर मोती बनना शुरू हो जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ साल का समय लग सकता है. इस दौरान पानी की गुणवत्ता, तापमान और सीपों की नियमित निगरानी करना बहुत जरूरी होता है.

कम जमीन में ज्यादा कमाई

मोती की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. छोटे तालाब या जलभराव वाले क्षेत्र भी इस काम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं.

मुरादाबाद में इस क्षेत्र से जुड़े छात्र और युवा भी इसे भविष्य के अच्छे व्यवसाय के रूप में देख रहे हैं. उनका मानना है कि अगर सही तरीके से मोती की खेती की जाए तो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं ज्यादा आय प्राप्त की जा सकती है.

इस व्यवसाय में शुरुआत में कुछ निवेश जरूर करना पड़ता है, लेकिन बाद में तैयार होने वाले मोतियों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. यही कारण है कि कई युवा अब इसे रोजगार के नए अवसर के रूप में देख रहे हैं.

दूसरे किसान भी हुए प्रेरित

डॉ. दीपक के प्रयासों का असर आसपास के गांवों में भी देखने को मिल रहा है. उनकी सफलता को देखकर कई किसान मोती की खेती की ओर आकर्षित हुए हैं.

स्थानीय किसान सुभाष चंद्र और उनकी पत्नी सुनीता भी अब इस काम से जुड़े हैं. उन्होंने अपने तालाबों में हजारों सीपों का पालन शुरू किया है. उनका मानना है कि मोती की खेती से होने वाली कमाई पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक हो सकती है.

किसानों का कहना है कि यह खेती न केवल आय बढ़ाने का अवसर देती है, बल्कि उन क्षेत्रों के लिए भी फायदेमंद है जहां जलभराव की समस्या रहती है और सामान्य फसलें अच्छी तरह नहीं उग पातीं.

युवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता

मोती की खेती सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है. यह युवाओं के लिए भी स्वरोजगार का एक अच्छा विकल्प बन रही है. इसके लिए बड़े उद्योग या बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती. सही प्रशिक्षण और धैर्य के साथ कोई भी व्यक्ति इस क्षेत्र में काम शुरू कर सकता है.

डॉ. दीपक अब स्थानीय किसानों और युवाओं को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़ सकें और अपनी आय बढ़ा सकें.

गांवों में बदलाव की नई कहानी

मुरादाबाद का यह मॉडल दिखाता है कि अगर किसान नई सोच अपनाएं तो खेती में कई नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. आज मोती की खेती सिर्फ एक प्रयोग नहीं रह गई है, बल्कि यह गांवों में रोजगार और आय बढ़ाने का एक मजबूत माध्यम बनती जा रही है.

मोती की खेती यह साबित कर रही है कि खेती केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है. सही जानकारी, नई तकनीक और धैर्य के साथ किसान ऐसे व्यवसाय भी अपना सकते हैं जो उन्हें बेहतर आय और स्थायी भविष्य दे सकें. मुरादाबाद की यह पहल देश के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है और दिखा रही है कि बदलाव की शुरुआत एक नए विचार से होती है.

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