जैसलमेर में रेतीले तूफान का खौफनाक दृश्यपश्चिमी विक्षोभ के असर से मंगलवार देर रात जैसलमेर जिले में आए भीषण रेतीले तूफान और आंधी-बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया. पाकिस्तान सीमा की दिशा से करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उठा यह तूफान सीमावर्ती इलाकों को पार करता हुआ अचानक जैसलमेर शहर में घुस गया और ऐतिहासिक सोनार किले को अपनी चपेट में ले लिया.
तूफान के दौरान सोनार किले के ऊपर से गुजरते धूल के विशाल बवंडर का दृश्य एक साथ भयावह और रोमांचक नजर आया. किले में रहने वाले लोगों में तेज हवाओं और उड़ती रेत के बीच दहशत का माहौल बन गया. देखते ही देखते पूरा शहर धूल के घने गुबार से ढक गया और आसमान में काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसे हालात बन गए.
तूफान के साथ तेज गर्जना, चमकती बिजली और मूसलाधार बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया. कई स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूट गईं और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचा. शहर में दृश्यता कम हो गई, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ. इस दौरान रामगढ़ के पास पारेवर में स्थित एक निजी सीमेंट प्लांट में बड़ा हादसा हो गया. तेज आंधी और बारिश के बीच टिन की चादरें उड़कर श्रमिकों के आवास पर गिर गईं, जिससे 18 मजदूर घायल हो गए. गंभीर रूप से घायल तीन श्रमिकों को प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर रेफर किया गया है.
रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तीसरे दिन मौसम का उग्र रूप देखने को मिला. रविवार को धूल भरी आंधी, सोमवार को तेज हवाओं और बारिश के बाद मंगलवार को फिर से भीषण तूफान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी. कस्बे और ग्रामीण इलाकों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ और कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई.
तूफान का सबसे अधिक असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा है. तेज हवाओं के कारण व्यापक स्तर पर बिजली ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया. जानकारी के अनुसार तीन दिन में आए तूफानों से 6 हजार से अधिक बिजली पोल, ट्रांसफॉर्मर और कई हाईटेंशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं. इसके चलते सैकड़ों गांव और ढाणियां अंधेरे में डूबी हुई हैं. रामगढ़ कस्बे में 24 घंटे से अधिक समय से बिजली आपूर्ति बाधित है, जिससे पेयजल आपूर्ति और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं.
मौसम विभाग ने पहले ही जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया था और लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों से बाहर न निकलने की अपील की थी. बावजूद इसके, अचानक आए इस तूफान ने भारी नुकसान पहुंचाया है. थार मरुस्थल में उठे इस शक्तिशाली धूल भरे बवंडर ने एक बार फिर क्षेत्र के मौसम की अनिश्चितता और उसकी विनाशकारी क्षमता का अहसास कराया है. लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, वहीं प्रशासन नुकसान के आकलन और राहत कार्यों में जुटा हुआ है.
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