
किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार की मेहनत से हम खाद्यान्न उत्पादन में न सिर्फ आत्मनिर्भर हो चुके हैं बल्कि संकट के समय दूसरे देशों के लिए भी सहारा बन रहे हैं. इस साल रिकॉर्ड 316 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है. इसके बावजूद एक कड़वा सच यह है कि अब भी देश की बड़ी आबादी कुपोषण की शिकार है. ऐसे में हमें थोड़ा ट्रैक बदलने की जरूरत है. सरकार के निर्देश पर इस काम में कृषि वैज्ञानिक जुट गए हैं. ताकि, कुपोषण की समस्या पर विजय हासिल की जा सके. इसका एक रास्ता है फसलों के बायोफोर्टिफिकेशन का. जिसके जरिए फसलों में मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छी चीजों को बढ़ाया और खराब चीजों को कम किया जा रहा है.
बायोफोर्टिफिकेशन, प्लांट ब्रीडिंग द्वारा फसलों की पोषक गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक है. ऐसी फसलें बेहतर पोषक तत्वों वाली किस्मों से उच्च-उपज वाली फसलों की किस्मों का संकरण कराके तैयार की जाती हैं. फिलहाल, रबी सीजन 2022-23 में गेहूं के कुल क्षेत्रफल में से 20 फीसदी से अधिक क्षेत्र में बायोफोर्टिफाइड किस्मों की बुवाई हुई है. जिनमें आयरन, जिंक तथा प्रोटीन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुताबिक देश की 15.3 फीसदी जनसंख्या कुपोषित है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली द्वारा चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा, मूंगफली, अलसी , सरसों, सोयाबीन, फूलगोभी, आलू, शकरकंदी, रतालू तथा अनार जैसी प्रमुख फसलों में पोषण से भरपूर कुल 87 बायोफोर्टिफाइड किस्मों का विकास करके इन्हें फसल उत्पादन के लिए अप्रूव्ड किया गया है. इनके प्रजनक बीज (Breeder Seed) पैदा कर विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों को फाउंडेशन एवं प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए उपलब्ध कराया गया है. यानी अब धीरे-धीरे बायोफोर्टिफाइड फसलों का कारवां बढ़ाने का प्लान है.
बायोफोर्टिफाइड किस्मों में आयरन, जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन, लायसिन, ट्रिप्टोफैन, प्रोविटामिन ए, एंथोसायनिन, विटामिन सी, ऑलिक अम्ल तथा लिनोलिक अम्ल के लिए सुधार किया गया है. जबकि कुछ किस्मों में अनेक पोषण रोधी कारकों (अंटीनुटरीसनल फैक्टर) जैसे कि इरूसिक अम्ल, ग्लूकोसिनोलेट और ट्रिप्सिन इनहीबिटर की मात्रा में उल्लेखनीय स्तर पर कमी की गई है. सोयाबीन में ऑफ फ्लेवर में भी कमी लाई गई है. पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा के साथ ये किस्में अधिक उपज देने वाली भी हैं.
प्रोटीन: यह वृद्धि और ऊतक (Tissue) की मरम्मत के लिए आवश्यक अमीनो एसिड प्रदान करता है. इसकी कमी से कमजोर बौद्धिक विकास, अव्यवस्थित शारीरिक क्रियाशीलता और यहां तक कि मृत्यु भी होती है. आहार में प्रोटीन की कमी से मनुष्यों में कई तरह के विकार होते हैं.
आयरन: यह एक खनिज तत्व है जो मांसपेशियों और मस्तिष्क के ऊतकों के समुचित कार्य के लिए जरूरी है. यह लाल रक्त कोशिका हीमोग्लोबिन द्वारा फेफड़ों से ऑक्सीजन को विभिन्न ऊतकों तक पहुंचाता है. खून की कमी अथवा एनीमिया मानव शरीर में आयरन की कमी का सबसे आम लक्षण है. आयरन की कमी से भी विकास कम होता है.
जिंक: यह एक खनिज तत्व है जो मनुष्यों में 300 से अधिक आवश्यक एंजाइमों में सह कारक के रूप में काम करता है. जिंक की कमी से धीमा विकास, भूख में कमी, बिगड़ी हुई प्रतिरोधक प्रणाली और संक्रमण के लिए संवेदनशीलता बढ़ जाती है.
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