
गेहूं उत्पादन में देश के दो प्रमुख राज्य पंजाब और मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संकट में घिर गई है. कहीं आढ़तियों की हड़ताल से मंडियां ठप पड़ी हैं तो कहीं बोरी की कमी ने व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है. इस स्थिति में किसान अपनी फसल लेकर मंडियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत और चिंता दोनों बढ़ रही हैं.
देश के अधिकांश राज्यों (यूपी को छोड़कर) में 1 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई है. पंजाब भी इनमें एक है. लेकिन मध्य प्रदेश खरीद की इस दौड़ में पिछड़ गया है जबकि उत्पादन में अव्वल स्थान रखता है. इसका कारण पीपी बैग (बोरी) की कमी बताई जा रही है. सरकार ने खरीद की तारीख को 1 अप्रैल से बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया है जिससे किसानों और संगठनों में भारी रोष है. दूसरी ओर, पंजाब में भी 1 अप्रैल से गेहूं खरीद का ऐलान हुआ, मगर आढ़तियों की हड़ताल से खरीद शुरू नहीं हो पाई. ये दोनों राज्य गेहूं उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं, लेकिन खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है.
पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू करने का ऐलान किया था, लेकिन आढ़तिया एसोसिएशन के हड़ताल पर चले जाने के कारण मंडियों में फसल की खरीद ठप पड़ी है. हालात यह हैं कि किसानों की फसल मंडियों में ज्यों की त्यों पड़ी हुई है.
आढ़तिया एसोसिएशन की मुख्य मांग है कि वर्ष 1995 से लागू 2.5 प्रतिशत कमीशन व्यवस्था को जारी रखा जाए. एसोसिएशन का कहना है कि सरकार द्वारा अब प्रति क्वांटल 45 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि 2.5 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से यह राशि कहीं अधिक बनती है. आढ़तियों के मुताबिक नई व्यवस्था से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है.
मोहाली जिले की खरड़ मंडी, जहां मोहाली और आसपास के इलाकों की फसल पहुंचती है, वहां भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं. मंडी के प्रधान नरेंद्र शर्मा का कहना है कि आढ़तिया एसोसिएशन की मुख्यमंत्री पंजाब से मुलाकात हुई, लेकिन बातचीत में कोई समाधान नहीं निकल पाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार कोई ठोस हल नहीं निकालती, हड़ताल जारी रहेगी.
नरेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार या तो केंद्र से बात करे या फिर हरियाणा की तर्ज पर कमीशन की भरपाई के लिए गैप मनी दे. उन्होंने चेतावनी दी कि खरड़ मंडी में करीब 6 लाख गट्टे (प्रत्येक 50 किलो) फसल पहुंचती है और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
आढ़तिया एसोसिएशन की यह हड़ताल पूरे पंजाब में जारी है. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और मंडियों में फसल खरीद को लेकर किसानों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है.
पंजाब के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने मंगलवार को कहा कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूं की खरीद के लिए जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं. कटारूचक ने कहा कि इन इंतजामों के तहत 1,897 खरीद केंद्र बनाए गए हैं. इसके अलावा, फसल की खरीद के लिए 266 अस्थायी यार्ड भी बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल पर की जाएगी.
कटारूचक ने आगे कहा कि राज्य को अप्रैल महीने के लिए 30,973 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मिली है. मंत्री ने कहा कि राज्य को 122 लाख मीट्रिक टन (MT) फसल खरीदने का लक्ष्य मिला है, जबकि उनके विभाग ने 132 लाख मीट्रिक टन फसल खरीदने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. हालांकि इन तैयारियों के बावजूद आढ़तियों की हड़ताल ने खरीदी के पहले दिन ही ब्रेक लगा दिया जिससे किसानों में मायूसी है.
मध्य प्रदेश में बारदाने की कमी ने गेहूं की खरीद प्रक्रिया रोक दी है. 1 अप्रैल से गेहूं खरीद का ऐलान हुआ था, मगर अचानक इसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया. सरकार ने बताया कि गेहूं रखने के लिए बोरी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, इसलिए खरीद को आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके बाद ‘बारदाने’ की भारी कमी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य और केंद्र के बीच तालमेल के अभाव और “डबल इंजन सरकार” की विफलता का खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं.
कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य तो तय कर दिया, लेकिन भंडारण के लिए जरूरी पीपी और एचडीपीपी बैग (बारदाना) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की. नतीजतन, मंडियों में किसानों को अपनी उपज लेकर इंतजार करना पड़ रहा है और खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. पत्र में दावा किया गया है कि लाखों मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य होने के बावजूद जमीनी तैयारी अधूरी है. किसानों को आशंका है कि कहीं देरी के कारण उनकी फसल खराब न हो जाए या उन्हें मजबूरी में औने-पौने दाम पर बेचनी न पड़े.
मध्य प्रदेश में किसान संगठनों ने बुधवार को कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद में हो रही देरी को लेकर आंदोलन शुरू करेंगे. मध्य प्रदेश देश के टॉप गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है. इस साल, राज्य सरकार ने किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने का फैसला किया है, जिससे कुल MSP 2,625 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा.
भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत (इंदौर-उज्जैन संभाग) के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पटेल ने कहा कि गेहूं की खरीद आमतौर पर 15 मार्च के आसपास शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल इसे बार-बार टाला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार "झूठे दावे" कर रही है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण प्लास्टिक की बोरियों की कमी हो गई है, जिसकी वजह से खरीद में देरी हो रही है.
पटेल ने दावा किया, "इस देरी के कारण, लगभग 60 प्रतिशत किसानों को ऋण डिफाल्टर घोषित कर दिया गया है, क्योंकि वे बैंकों और सहकारी समितियों को अपना लोन चुकाने में असमर्थ हैं. दूसरी ओर, व्यापारी इस स्थिति का गलत लाभ उठा रहे हैं और MSP से कम कीमतों पर गेहूं खरीद रहे हैं." संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बबलू जाधव ने कहा कि राज्य सरकार की अस्थिर और अव्यवस्थित गेहूं खरीद नीतियों ने किसानों को संकट में डाल दिया है.
उन्होंने कहा, "शुरुआत में गेहूं खरीद शुरू करने की तारीख 15 मार्च घोषित की गई थी. फिर इसे टालकर 1 अप्रैल कर दिया गया. अब इसे और पीछे धकेलकर 10 अप्रैल कर दिया गया है. कुछ संभागों में, उन्होंने 15 अप्रैल से खरीद शुरू करने का फैसला किया है. यह देरी किसानों के साथ अन्याय है और उनकी कड़ी मेहनत पर एक करारा प्रहार है."
जाधव ने कहा कि यदि MSP पर गेहूं खरीद की व्यवस्था को सुव्यवस्थित नहीं किया गया और लोन चुकाने की तारीखों को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो किसान एक विशाल आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.