
जहां आज खेती को घाटे का सौदा बताकर कई लोग मायूस हैं, वहीं महाराष्ट्र के अंबाजोगाई शहर के पास रहने वाले एक छोटे किसान ने अपनी मेहनत और सटीक योजना से सफलता की नई इबारत लिख दी है. बालासाहेब चोपणे नाम के इस किसान ने अपनी मात्र 4 गुंठा (करीब 4,000 वर्ग फुट) जमीन में पुदीने की खेती कर 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है.
बालासाहेब के पास कुल 20 गुंठा जमीन है, जिसमें उन्होंने अमरूद, आम और फूलों के पौधे लगाए हैं. लेकिन 2020 में उन्होंने एक प्रयोग के तौर पर 4 गुंठा जमीन में पुदीना लगाया. इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता. पूरी तरह से जैविक (Organic) होने के कारण इस पुदीने का स्वाद और सुगंध बाजार में मिलने वाले अन्य पुदीने से कहीं बेहतर है.
पुदीने की फसल नाजुक होती है और इसे नियमित पानी की जरूरत होती है, जिसे बालासाहेब ने अपने बोरवेल के जरिए पूरा किया. उन्होंने बिचौलियों या व्यापारियों को फसल बेचने के बजाय खुद साप्ताहिक बाजारों में जाकर पुदीना बेचना शुरू किया. इससे उन्हें हर महीने लगभग 5,000 रुपये की बंधी-बंधाई आय होने लगी. पिछले पांच सालों में यह छोटी सी राशि जमा होकर 5 लाख के पार पहुंच गई है.
पुदीने में औषधीय गुण होने के साथ-साथ इसकी मांग साल भर रहती है. चाय, बिरयानी, पानीपुरी, चटनी, जूस और बर्गर जैसे व्यंजनों में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग होता है. शून्य निवेश और कम जगह में यह फसल किसानों के लिए 'कैश क्रॉप' (नकदी फसल) साबित हो रही है.
बालासाहेब और उनके बेटे ने मिलकर इस छोटे से जमीन के टुकड़े को सोने की खान बना दिया है. उनकी यह 'लो-कॉस्ट, हाई-प्रॉफिट' तकनीक आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मार्गदर्शक बन गई है.
किसान बालासाहेब ने बताया कि कोविड 19 के समय में उन्होंने पुदीने की खेती का महत्व समझा और अपने 4 प्लॉट में ऑर्गेनिक पुदीना लगाया. वे मंगलवार और शुक्रवार को अंबाजोगाई में लगने वाले बाजार में जाता हैं और पुदीना बेचते हैं. इससे उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये मिलते हैं, यानी हर साल 1 लाख रुपये मिलते हैं. इससे बची हुई जमीन में उन्होंने चीकू, पेरू, आंबा और राव आंवले लगाए हैं. बाकी किसानों के लिए उनका संदेश है कि वे भी अपनी खेती को ऑर्गेनिक बनाएं.