धान से बहु-फसली खेती तक, जानें किसान मधुकर कैसे बने सफलता की मिसाल

धान से बहु-फसली खेती तक, जानें किसान मधुकर कैसे बने सफलता की मिसाल

छत्तीसगढ़ में कृषि को नई दिशा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम बारगांव के किसान कुंवर सिंह मधुकर ने अपनी मेहनत और सोच से खेती की एक नई मिसाल पेश की है.

किसान मधुकर की सफलता की कहानीकिसान मधुकर की सफलता की कहानी
संदीप कुमार
  • Noida,
  • May 08, 2026,
  • Updated May 08, 2026, 3:45 PM IST

छत्तीसगढ़ में कृषि को नई दिशा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इन प्रयासों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है. जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम बारगांव के किसान कुंवर सिंह मधुकर ने अपनी मेहनत और सोच से खेती की एक नई मिसाल पेश की है. कभी सिर्फ धान की खेती पर निर्भर रहने वाले मधुकर ने समय के साथ बड़ा बदलाव किया. उन्होंने समझा कि सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. इसके बाद उन्होंने अपने 18 एकड़ खेत में फसल विविधीकरण अपनाने का फैसला किया. यह निर्णय उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.

मधुकर इस फसलों की करते हैं खेती

किसान कुंवर सिंह मधुकर ने अपने खेतों में अब कई तरह की फसलें उगानी शुरू की है. उन्होंने काली मिर्च, आम, नींबू, एप्पल बेर, कटहल, कुंदरू, परवल, खीरा, लौकी और डोडका जैसी सब्जियों की खेती शुरू की है. इसके अलावा उन्होंने 1700 ऑस्ट्रेलियन टीक के पौधे भी लगाए हैं. इस तरह उनका खेत अब सिर्फ धान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बहु-फसली मॉडल बन चुका है.

किसान की पूरे साल हो रही कमाई

उनके खेत में आज लगभग 250 कटहल के पेड़, 600 नए और 250 पुराने नींबू के पौधे, 100 एप्पल बेर और 300 काली मिर्च के पौधे मौजूद हैं. इन फसलों के कारण उन्हें पूरे साल आय मिल रही है. सब्जियों की खेती से भी लगातार कमाई हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में दो से तीन गुना बेहतर हो गई है. किसान मधुकर का कहना है कि पहले वे केवल धान पर निर्भर थे, लेकिन मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव से कई बार नुकसान हो जाता था. अब अलग-अलग फसलों के कारण जोखिम कम हो गया है और आमदनी स्थिर बनी रहती है.

सफलता को देखकर जिला प्रशासन प्रभावित

उनकी इस सफलता को देखकर जिला प्रशासन भी काफी प्रभावित है. कलेक्टर ने स्वयं उनके खेत का निरीक्षण किया और उनके प्रयासों की सराहना की. प्रशासन का मानना है कि फसल विविधीकरण किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प है, जिससे खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है. उनकी खेती को देखने के बाद अधिकारियों ने अन्य किसानों को भी किसान मधुकर के मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही है, ताकि वे भी अपनी कमाई बढ़ा सकें और आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकें.

कुंवर सिंह मधुकर की यह कहानी आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गई है. यह साबित करती है कि अगर किसान परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नई तकनीक और अलग-अलग फसलों को अपनाएं, तो सीमित जमीन में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. 

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