
यूपी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में विविधीकरण (Crop Diversification) मॉडल अपनाने पर जोर दे रही है. प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को इसके फायदे समझा रहे हैं. साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक और प्राकृतिक तरीकों से खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
Firozabad जनपद के हाथवंत ब्लॉक के साथी गांव निवासी किसान सचिन राजपूत ने महज 10 बिस्वा खेत में विविधीकरण मॉडल अपनाकर एक नई पहचान बनाई है. उनके इस प्रयास की आज पूरे जिले में सराहना हो रही है.
सचिन राजपूत ने अपने छोटे से खेत में 27 प्रकार की फसलें उगाई हैं. इनमें हरी सब्जियों के साथ-साथ जीरा और सौंफ जैसे मसालेदार फसलें भी शामिल हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने खेत की मेड़ पर गेंदा के फूल भी लगाए हैं.
उनका कहना है कि गेंदा जैसे फूलों से खेत में परागण (Pollination) बेहतर होता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है. फूलों की खुशबू और कीट नियंत्रण के प्राकृतिक गुण भी फसल को सुरक्षित रखते हैं.
यह पूरा मॉडल प्राकृतिक खेती पर आधारित है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर उन्होंने जैविक और देशी तरीकों से खेती की है. परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता बेहतर है और लागत भी कम आई है.
सचिन राजपूत बताते हैं कि खेती में विविधीकरण के कई बड़े लाभ हैं—
उनका मानना है कि विविध फसलों से खेत की मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जैव विविधता बढ़ती है, जिससे भूमि लंबे समय तक उपजाऊ रहती है.
सचिन राजपूत का यह मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरा है. कम जमीन में अधिक फसलें उगाकर आय बढ़ाना संभव है, बशर्ते सही योजना और प्रशिक्षण के साथ खेती की जाए.
खेती में विविधीकरण न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है.