पॉलीहाउस नर्सरी से बदली किसान प्रवीण सैनी की तकदीर, 75 लाख सालाना टर्नओवर, इतना हो रहा मुनाफा

पॉलीहाउस नर्सरी से बदली किसान प्रवीण सैनी की तकदीर, 75 लाख सालाना टर्नओवर, इतना हो रहा मुनाफा

पॉलीहाउस में सब्जियों की नर्सरी तैयार करके किसान अच्छी कमाई कर सकता है. फर्रुखाबाद के करमपुर के किसान प्रवीण सैनी ने इस मॉडल को अपना कर आज सब्जियों की नर्सरी से अच्छी कमाई कर रहे हैं.

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पॉलीहाउस नर्सरी से बदली किसान प्रवीण सैनी की तकदीर, 75 लाख सालाना टर्नओवर, इतना हो रहा मुनाफा

फर्रुखाबाद जनपद के मोहम्मदाबाद ब्लॉक के सिरोली करनपुर गांव के प्रगतिशील किसान प्रवीण सैनी ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए सब्जियों की उन्नत नर्सरी तैयार करने का कार्य शुरू किया और आज इसी से लाखों रुपये का सालाना मुनाफा कमा रहे हैं. नियंत्रित वातावरण में पौध तैयार कर वे न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी बेहतर गुणवत्ता की नर्सरी उपलब्ध करा रहे हैं.

2020 के बाद बदली खेती की दिशा

प्रवीण सैनी पहले परंपरागत खेती करते थे, जिसमें लागत अधिक और मुनाफा अनिश्चित रहता था. वर्ष 2020 के बाद उन्होंने सब्जियों की नर्सरी उत्पादन का निर्णय लिया. पॉलीहाउस तकनीक अपनाकर उन्होंने कम समय में उच्च गुणवत्ता वाली, रोगमुक्त और मजबूत पौध तैयार करना शुरू किया. यही बदलाव उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुआ.

दो पॉलीहाउस में सालाना 40 लाख पौधे

वर्तमान में प्रवीण सैनी 1000 वर्गमीटर के दो पॉलीहाउस में जायद और खरीफ सीजन की सब्जियों की नर्सरी तैयार करते हैं. सालभर में लगभग 40 लाख से अधिक पौधे तैयार होते हैं. कुल वार्षिक बिक्री करीब 75 लाख रुपये तक पहुंचती है. इसमें से लगभग 20 लाख रुपये शुद्ध मुनाफा होता है. पॉलीहाउस स्थापना में उन्हें सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान मिला, जिससे शुरुआती लागत काफी कम हो गई.

आधुनिक तकनीक से बेहतर अंकुरण

  • नर्सरी उत्पादन के लिए वे दो-तीन महीने पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। उनकी प्रमुख तकनीकें हैं..
  • नियंत्रित तापमान में पौध उत्पादन
  • जर्मिनेशन चैंबर की व्यवस्था
  • ट्रे में अंकुरण के लिए कोकोपीट का उपयोग
  • उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन
  • इन तकनीकों से पौधों का अंकुरण दर बेहतर होता है और किसानों को मजबूत व रोगमुक्त पौधे मिलते हैं.

किसानों को 15-20 दिन का फायदा

प्रवीण सैनी की तैयार नर्सरी लेने से किसानों को 15 से 20 दिन का समय बचता है. इससे वे 50 से 60 दिन में फसल तैयार कर बाजार में बेचने लगते हैं. समय की यह बचत सीधे मुनाफे में बदलती है। साथ ही, अच्छी गुणवत्ता की पौध से उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

जायद सीजन के लिए तैयार प्रमुख फसलें

इस समय जायद सीजन के लिए तीन अलग-अलग रंगों की तरबूज की वैरायटी तैयार है. इसके अलावा- भिंडी, तोरी, करेला, टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, खीरा एक सीजन में ही वे करीब 20 लाख पौधे तैयार कर लेते हैं.

अन्य किसानों को भी दे रहे प्रशिक्षण

प्रवीण सैनी अब स्वयं तक सीमित नहीं हैं. वे अन्य किसानों को भी पॉलीहाउस में नर्सरी उत्पादन की उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनका मानना है कि नियंत्रित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार कर किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

सब्जियों की नर्सरी उत्पादन ने न केवल प्रवीण सैनी की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक नया और टिकाऊ रास्ता भी खोल दिया है.

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