
खरीफ 2026 सीजन के लिए खादों की स्थिति को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. 19 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रमुख खादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को फिलहाल किसी बड़ी कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है.
आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में कुल 383.92 लाख मीट्रिक टन (LMT) खाद की जरूरत आंकी गई है. जून 2026 के दौरान ही 72.22 LMT की जरूरत थी, जिसके मुकाबले 274.22 LMT खाद उपलब्ध रही. अब तक 112.23 LMT की बिक्री हो चुकी है और 161.99 LMT का स्टॉक बचा है.
अगर अलग-अलग खादों की बात करें तो यूरिया 124.43 LMT उपलब्ध है जिसमें 56.48 LMT बिक्री हुई है और 67.95 LMT स्टॉक बचा है. DAP (डीएपी) 30.88 LMT उपलब्ध है, जो जरूरत (10.92 LMT) से काफी ज्यादा है. इसके साथ ही MOP (एमओपी) 12.45 LMT मौजूद है. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, NPK 71.98 LMT और SSP 34.48 LMT उपलब्ध है.
खास बात यह है कि डीएपी का शुरुआती स्टॉक पिछले साल के मुकाबले 11.78 LMT ज्यादा है, जो आगे की मांग को पूरा करने में मदद करेगा.
खरीफ 2026 सीजन से पहले केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए खादों की सप्लाई को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया. सरकार ने यूरिया के घरेलू उत्पादन में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की और साथ ही आयात के जरिए भी स्टॉक को मजबूत किया. घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों से खाद खरीदकर सप्लाई चेन को सुरक्षित किया गया है, ताकि ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन जैसी लड़ाई का असर किसानों पर न पड़े.
पश्चिम एशिया संकट के बीच खाद संकट दूर करने के लिए सरकार ने एम्पावर्ड पूल मैनेजमेंट कमेटी (EPMC) के जरिए 7.31 MMSCMD अतिरिक्त गैस स्पॉट आधार पर खरीदी गई. इससे खाद प्लांटों को कुल गैस सप्लाई 32 MMSCMD से बढ़कर 39.31 MMSCMD हो गई. इसी का असर हुआ कि रोजाना यूरिया उत्पादन 54,500 मीट्रिक टन से बढ़कर 67,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. खाद प्लांट्स को उनकी जरूरत का करीब 76 प्रतिशत गैस दी जा रही है, जबकि पहले यह आंकड़ा 62 प्रतिशत था. इससे उत्पादन अधिक स्थिर और तेज हुआ है.
सरकार ने केवल घरेलू उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि आयात बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया. दुनिया में जारी उठापटक, खासकर पश्चिम एशिया में हालात को ध्यान में रखते हुए पहले से टेंडर जारी किए गए और अलग-अलग देशों से सप्लाई सुनिश्चित की गई जिसका पॉजिटिव असर अब देखा जा रहा है.
खादों की उपलब्धता संतोषजनक रहने के पीछे एक बड़ी वजह मॉनसून की देरी भी है. मॉनसून की देरी और बारिश की कमी से खाद की मांग कम रही. अगर मॉनसूनी बारिश समय से हुई रहती तो फसलों की बुवाई तेज होती और खादों की मांग बढ़ जाती. लेकिन इस बार जून पूरी तरह सूखा रहा और खरीफ फसलों की बुवाई 23 फीसद तक गिर गई. इसमें सबसे बड़ा नुकसान कपास और सोयाबीन जैसी फसलों को हुआ है. बाकी फसलों की बुवाई भी धीमी है जिससे खाद की मांग घटी है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक सभी प्रमुख खादों जैसे यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी का स्टॉक पर्याप्त स्तर पर है. इससे किसानों को खरीफ बुवाई के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. कुल मिलाकर, खरीफ 2026 के लिए खादों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, जिससे खेती का काम सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है.