
इंडोनेशिया ने वैश्विक उर्वरक बाजार में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, इंडोनेशिया ने भारत समेत फिलीपींस, थाईलैंड और ब्राजील को कुल 10 लाख टन उर्वरक निर्यात करने के लिए बातचीत कर रहा है. यह जानकारी इंडोनेशिया के कैबिनेट सचिव टेडी इंद्र विजया ने राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में दी. कैबिनेट सचिव के अनुसार, प्रस्तावित 10 लाख टन खाद निर्यात ऑस्ट्रेलिया को पहले से तय 2.5 लाख टन उर्वरक आपूर्ति के अतिरिक्त होगा.
यानी इंडोनेशिया वैश्विक बाजार में अपने खाद निर्यात को तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है. इससे कई देशों को खाद की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है.
इंडोनेशिया कृषि उत्पादन के साथ-साथ खाद निर्माण में भी एक मजबूत देश माना जाता है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए टेडी इंद्र विजया ने बताया कि देश में यूरिया खाद का कुल घरेलू उत्पादन 78 लाख टन है, जबकि घरेलू जरूरत करीब 63 लाख टन है. इसका मतलब ये है कि घरेलू मांग पूरी करने के बाद भी इंडोनेशिया के पास अतिरिक्त उत्पादन उपलब्ध है, जिसे वह निर्यात कर सकता है.
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह खबर अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां खेती के लिए यूरिया और अन्य उर्वरकों की मांग लगातार बनी रहती है. अगर इंडोनेशिया से आयात आता है, तो भारतीय बाजार में सप्लाई बेहतर हो सकती है और कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है. इसके अलावा आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को आसानी से खाद मिल सकता है. फिलीपींस, थाईलैंड और ब्राजील जैसे देशों के लिए भी यह समझौता फायदेमंद हो सकता है, जहां कृषि क्षेत्र में उर्वरक की बड़ी जरूरत रहती है.
इस बीच वैश्विक स्तर पर उर्वरक संकट को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एजेंसी के प्रमुख ने हाल ही में कहा था कि ईरान युद्ध के कारण उर्वरकों की कमी कृषि प्रधान देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती है. बता दें कि युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, जिसका सीधा असर उर्वरक उद्योग पर पड़ता है, क्योंकि कई उर्वरक प्राकृतिक गैस आधारित होते हैं. ऐसे में इंडोनेशिया का अतिरिक्त उर्वरक निर्यात कई देशों के लिए राहत साबित हो सकता है.