
हरियाणा में धान की रोपाई का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन किसान इन दिनों खेतों से ज्यादा खाद की दुकानों और सहकारी समितियों के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं. सोनीपत जिले के किसानों का कहना है कि यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद समय पर नहीं मिल रही है, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है. किसानों के मुताबिक, खाद लेने के लिए पहले पोर्टल पर जमीन और अन्य जानकारी अपडेट करनी होती है. इसके बाद ही खाद के बैग मिलते हैं. लेकिन समस्या ये है कि कई जगह पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है और तकनीकी खामियों के कारण किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा. ऐसे में किसान न तो रजिस्ट्रेशन करा पा रहे हैं और न ही समय पर खाद ले पा रहे हैं.
किसानों का आरोप है कि वे एक दुकान से दूसरी दुकान और एक सहकारी समिति से दूसरी सहकारी समिति तक भटकने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि सरकार ने पोर्टल की व्यवस्था तो बना दी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी खामियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है. वहीं, सरकारी अधिकारी खाद की उपलब्धता के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है. खरीफ सीजन की खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी और पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. उनका कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो धान की फसल पर इसका असर पड़ सकता है.
खाद विक्रेता संजय सिंगला ने बताया कि सरकारी पोर्टल पर भले ही यूरिया का पर्याप्त स्टॉक दिखाया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है. उनके अनुसार, दुकानों तक जरूरत के हिसाब से खाद नहीं पहुंच रही, जिससे किसानों और विक्रेताओं दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत करीब 60 फीसदी खाद सहकारी समितियों के जरिए और 40 फीसदी खाद निजी विक्रेताओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचती है. किसान और खाद विक्रेता एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन पोर्टल आधारित व्यवस्था और खाद की सीमित उपलब्धता ने दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
किसानों का आरोप है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और खाद की कमी के कारण उन्हें समय पर यूरिया और अन्य उर्वरक नहीं मिल पा रहे हैं. ऐसे में किसानों और विक्रेताओं का मानना है कि सरकार को खाद की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाना चाहिए, ताकि किसानों को सही समय पर उर्वरक मिल सके और फसल उत्पादन प्रभावित न हो.
हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि सरकार के पास यूरिया खाद का भरपूर स्टॉक उपलब्ध है. विभाग का कहना है कि डीएपी खाद की कमी भी अब दूर हो चुकी है और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार भरपूर स्टॉक होने का दावा कर रही है तो फिर किसान और खाद व्यापारी परेशान क्यों हैं? आखिर खाद गोदामों से निकलकर किसानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही? और क्या धान की रोपाई के इस समय में किसानों की परेशानी दूर हो पाएगी?