खाद संकट से निपटने की तैयारी, विदेश से आएगा लाखों टन यूरिया, खरीफ से पहले बड़ा फैसला

खाद संकट से निपटने की तैयारी, विदेश से आएगा लाखों टन यूरिया, खरीफ से पहले बड़ा फैसला

खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया की कमी और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है. घटते स्टॉक को देखते हुए सरकार ने 25 लाख टन यूरिया आयात करने का फैसला लिया है. इसका मकसद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखना है, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो.

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खाद संकट से निपटने की तैयारी, विदेश से आएगा लाखों टन यूरिया, खरीफ से पहले बड़ा फैसलासरकार ने बढ़ाया यूरिया आयात

खेती के लिए जरूरी खाद यूरिया को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. भारत ने 25 लाख टन यूरिया विदेशों से मंगाने का फैसला किया है. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और फसल अच्छी हो.  यूरिया की कीमतों में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कुछ ही महीनों में इसकी कीमत लगभग 84 प्रतिशत तक बढ़ गई है. पहले जहां कीमत कम थी, अब यह बहुत महंगा हो गया है. इससे सरकार पर खर्च बढ़ रहा है, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए यह जरूरी कदम माना जा रहा है. 

कहां से आएगा यूरिया?

सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे यूरिया ऐसे देशों से खरीदें जहां से सुरक्षित तरीके से आपूर्ति हो सके. यह यूरिया रूस, मिस्र, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आ सकता है. इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद देश में पहुंच सके. 

स्टॉक में आई कमी

खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया का स्टॉक कम हो गया है. 1 अप्रैल 2026 को यूरिया का भंडार 54.22 लाख टन था, जो पिछले साल से कम है. यह पिछले चार साल में सबसे कम स्तर माना जा रहा है. अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों पर असर पड़ सकता है. 

फसलों पर पड़ सकता है असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यूरिया की कमी रही, तो खासकर धान (चावल) की फसल प्रभावित हो सकती है. भारत में धान की खेती का बड़ा हिस्सा खरीफ सीजन में होता है. इसलिए इस समय खाद की सही मात्रा में उपलब्धता बहुत जरूरी है. 

सरकार की तैयारी

सरकार इस समस्या को समझते हुए पहले से तैयारी कर रही है. अप्रैल और मई के महीनों में, जब खाद की मांग कम होती है, तब सरकार भंडार बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इससे खरीफ सीजन में किसानों को आसानी से खाद मिल सकेगी. 

अगर इसे आसान शब्दों में समझें, तो जैसे हमें खाना बनाने के लिए जरूरी सामान चाहिए होता है, वैसे ही किसानों को फसल उगाने के लिए यूरिया चाहिए होता है. अगर यूरिया कम होगा, तो फसल भी कमजोर हो सकती है. इसलिए सरकार अभी से ज्यादा यूरिया मंगा रही है, ताकि किसानों को परेशानी न हो और देश में अनाज की कमी न हो.

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