
केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाली खाद की बिक्री को ज्यादा पारदर्शी और जरूरत आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत 20 राज्यों के 40 जिलों में 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' नाम से पायलट प्रोजेक्ट शुरू की गई है. इस व्यवस्था में किसानों को उनकी जमीन और बोई गई फसल के आधार पर खाद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी.
नई व्यवस्था के तहत किसान या उनका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकेगा. रजिस्ट्रेशन के दौरान जमीन का विवरण और बोई गई फसल की जानकारी देनी होगी. इसके बाद किसान अपनी जरूरत के अनुसार पहले से खाद की बुकिंग कर सकेगा. सरकार का उद्देश्य मांग का बेहतर आकलन करना और समय पर खाद उपलब्ध कराना है.
सरकार ने बताया कि यह पायलट परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है. फिलहाल इसे 20 राज्यों के 40 जिलों में शुरू किया गया है. इन जिलों में पात्र किसानों को उनकी भूमि और फसल के आधार पर ही सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराई जा रही है. पायलट के नतीजों के आधार पर भविष्य में इस व्यवस्था के विस्तार पर फैसला लिया जा सकता है.
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि देशभर में तेलंगाना सहित, उर्वरक विभाग ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली लागू कर रखी है. इसके तहत किसानों को आधार प्रमाणीकरण के बाद रियायती दर पर खाद बेची जाती है. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे.
उन्हाेंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में करीब 2.87 लाख सक्रिय उर्वरक विक्रेताओं के नेटवर्क के माध्यम से 746.57 लाख मीट्रिक टन सब्सिडी वाली खाद 8.4 करोड़ लाभार्थी किसानों को बेची गई. इस अवधि में केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के रूप में 2.17 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया.
सरकार ने बताया कि सब्सिडी वाली खाद की बिक्री के लिए 100 प्रतिशत आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है. खाद का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रति खरीदार हर महीने अधिकतम 50 बैग खरीदने की सीमा तय की गई है. हालांकि, तेलंगाना में प्रति एकड़ अधिकतम दो बैग यूरिया खरीदने की सीमा लागू है, जबकि जम्मू-कश्मीर में एक सीजन के दौरान प्रति खरीदार 60 बैग तक खरीद की अनुमति है.
उर्वरक खरीद से जुड़े सभी रिकॉर्ड इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराए जाते हैं. राज्य सरकारों के अधिकारी इन आंकड़ों के आधार पर खाद की बिक्री और वितरण की निगरानी कर सकते हैं. नई व्यवस्था से जरूरतमंद किसानों तक सही मात्रा में खाद पहुंचाने और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को ज्यादा असरदार बनाने में मदद मिलेगी. (एएनआई)