खेत बचाओ अभियान की शुरुआत, शिवराज सिंह बोले- मिट्टी की जांच के बाद ही डालें खाद

खेत बचाओ अभियान की शुरुआत, शिवराज सिंह बोले- मिट्टी की जांच के बाद ही डालें खाद

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के करनाल से खेत बचाओ अभियान की शुरुआत की. 30 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान में किसानों को मिट्टी की जांच, संतुलित खाद के इस्तेमाल, प्राकृतिक खेती और फसल चक्र अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा. इसका उद्देश्य खेती की लागत घटाना, मिट्टी की उर्वरता बचाना और किसानों को लाभ पहुंचाना है.

हरियाणा के किसानों को बड़ी सौगातहरियाणा के किसानों को बड़ी सौगात
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 22, 2026,
  • Updated Oct 22, 2026, 6:28 PM IST

हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर 2026 को देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की. इस अभियान का उद्देश्य खेतों की मिट्टी को स्वस्थ रखना, रासायनिक खादों और कीटनाशकों का सही इस्तेमाल बढ़ाना और किसानों की खेती की लागत कम करना है. इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से सीधा संवाद किया और खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि खेतों की मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी अच्छी फसल होगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी. यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर में चलाया जाएगा.

किसानों के सम्मान और खेती की रक्षा पर जोर

किसान चौपाल में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह खुद को किसानों का सेवक मानते हैं. किसानों का सम्मान और उनकी खेती की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसके साथ जमीन की सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ऐसी खेती अपनाएं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहे और खेती पर होने वाला खर्च भी कम हो. इसके लिए किसानों को वैज्ञानिक तरीकों के साथ पारंपरिक खेती के अच्छे तरीकों को भी अपनाना चाहिए.

मिट्टी की जांच के बाद ही करें खाद का इस्तेमाल

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद डालने से बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि कई बार किसान दूसरे किसानों को देखकर अपने खेतों में भी ज्यादा खाद डाल देते हैं. उन्हें लगता है कि ज्यादा खाद डालने से फसल ज्यादा होगी, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जरूरत से ज्यादा यूरिया और डीएपी डालने से मिट्टी की सेहत खराब हो सकती है. इससे खेती की लागत भी बढ़ती है. इसलिए किसानों को पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच करानी चाहिए और फिर उसी के अनुसार खाद का इस्तेमाल करना चाहिए.

उन्होंने किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड यानी मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग करने की सलाह दी. इस कार्ड से पता चलता है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और कितनी खाद की जरूरत है. इससे किसान बिना जरूरत खाद खरीदने और खेत में डालने से बच सकते हैं.

सरकार खाद पर दे रही है सब्सिडी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी दे रही है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने देना है. उन्होंने किसानों को समझाया कि खाद सस्ती मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसका इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा किया जाए. खाद का सही मात्रा में इस्तेमाल करने से खेती का खर्च कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत खाद बनाने में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए ग्रीन अमोनिया जैसी तकनीकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

प्राकृतिक खेती से घट सकती है लागत

किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को लेकर भी चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सही तरीके से प्राकृतिक खेती करने पर किसानों को फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसे अपनाने के लिए सही जानकारी और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल जरूरी है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे शुरुआत में अपने पूरे खेत में प्राकृतिक खेती करने के बजाय आधे एकड़ या एक एकड़ में इसे आजमाएं. इससे वे इस तरीके को समझ सकेंगे और अपने खेत में इसके परिणाम देख सकेंगे. प्राकृतिक खेती में गाय के गोबर, गोमूत्र और जैविक पदार्थों से तैयार खाद का इस्तेमाल किया जाता है. बीजामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक उत्पाद भी इसमें उपयोग किए जाते हैं. सही तरीके से इनका इस्तेमाल करने से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाते समय फसल, मिट्टी और स्थानीय मौसम के अनुसार कृषि वैज्ञानिकों की सलाह भी लेनी चाहिए.

फसल चक्र अपनाने से सुधरेगी मिट्टी की सेहत

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी. फसल चक्र का मतलब है कि किसान हर बार एक ही फसल उगाने के बजाय अलग-अलग फसलें उगाएं. उन्होंने कहा कि धान और गेहूं की लगातार खेती करने के बजाय किसानों को चना, मसूर और अरहर जैसी दलहनी फसलों को भी अपने खेती के चक्र में शामिल करना चाहिए. इन फसलों की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती हैं. नाइट्रोजन पौधों की बढ़त के लिए जरूरी पोषक तत्व है. फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने और कुछ कीटों तथा बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है.

पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान

केंद्रीय कृषि मंत्री ने पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा के किसानों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों ने पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए बेहतर प्रयास किए हैं. सुपर सीडर जैसी मशीनों के इस्तेमाल से पराली को खेत में संभालने और अगली फसल की बुवाई करने में मदद मिलती है. उन्होंने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की. पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवों को भी नुकसान पहुंचता है. केंचुए और दूसरे सूक्ष्म जीव मिट्टी को उपजाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पराली का सही प्रबंधन करने से प्रदूषण कम करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

देसी गाय और पशुपालन पर भी हुई चर्चा

किसान चौपाल में देसी गायों के संरक्षण, दूध की कीमत और पशुपालन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए. किसानों ने बछिया पैदा करने में मदद करने वाली लिंग-वर्गीकृत वीर्य तकनीक पर सवाल पूछे. इस तकनीक का उद्देश्य कृत्रिम गर्भाधान के जरिए बछिया पैदा होने की संभावना बढ़ाना है. कार्यक्रम में मौजूद वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को किसानों के लिए सस्ता और सुलभ बनाने से जुड़े प्रयासों पर चर्चा की. साथ ही, प्राकृतिक खेती में गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल तथा देसी गायों से किसानों को होने वाले संभावित लाभ पर भी जोर दिया गया.

हरियाणा के 28,422 परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के ग्रामीण परिवारों के लिए भी बड़ी घोषणा की. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत राज्य के पात्र गरीब परिवारों के लिए 28,422 पक्के मकानों को मंजूरी दी गई है. इन मकानों के निर्माण के लिए 1,343.06 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है. केंद्रीय मंत्री ने इससे संबंधित मंजूरी पत्र हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा को सौंपा. इस योजना का उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने में मदद करना है.

30 नवंबर तक गांव-गांव पहुंचेंगे कृषि वैज्ञानिक

खेत बचाओ अभियान के तहत 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों से गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करने की अपील की. इस दौरान किसानों को मिट्टी की जांच, संतुलित खाद के इस्तेमाल, फसल चक्र, प्राकृतिक खेती और पराली प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी. अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के ऐसे तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिनसे जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहे और खेती की लागत कम करने में मदद मिले. कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मिट्टी की सेहत बचाने, खाद का संतुलित इस्तेमाल करने, फसल चक्र अपनाने और पराली नहीं जलाने का संकल्प लिया. केंद्रीय कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों से मिले सुझावों और खेती से जुड़ी समस्याओं पर सरकार जरूरी कदम उठाने का प्रयास करेगी.

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