
महाराष्ट्र के लातूर जिले में गन्ने की खड़ी फसल में आग लगने से तीन किसानों को भारी नुकसान हुआ है. शहर के पास स्थित खोपेगांव में बिजली की तारों में शॉर्ट सर्किट होने के बाद पास लगे बिजली के डीपी में जोरदार धमाका हुआ. इसके बाद खेत में खड़ी सूखी गन्ने की फसल में आग लग गई. देखते ही देखते आग ने करीब 10 एकड़ खेत में लगी गन्ने की फसल को अपनी चपेट में ले लिया. आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीम और गांव के लोगों को करीब दो घंटे तक मेहनत करनी पड़ी. इस दौरान आग को आगे फैलने से रोक लिया गया और आसपास के 12 एकड़ खेत में लगी गन्ने की फसल को बचा लिया गया. इस घटना के बाद प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर आर्थिक मदद देने की मांग की है.
यह घटना लातूर शहर के पास स्थित खोपेगांव की है. जानकारी के मुताबिक, खेतों में बिजली की सप्लाई करने वाली तार में शॉर्ट सर्किट हुआ. इसके बाद पास में लगे बिजली के डीपी में जोरदार धमाका हुआ. धमाके के कारण निकली चिंगारी से खेत में खड़ी सूखी गन्ने की फसल में आग लग गई. गन्ने की फसल सूखी होने के कारण आग तेजी से फैलने लगी. कुछ ही समय में आग ने तीन किसानों के खेतों में लगी करीब 10 एकड़ गन्ने की फसल को अपनी चपेट में ले लिया. आग इतनी तेज थी कि किसानों को अपनी फसल बचाने का मौका तक नहीं मिला. देखते ही देखते कई महीनों की मेहनत से तैयार की गई फसल जलकर राख हो गई.
खेतों में आग लगने के बाद आसमान में काला धुआं उठने लगा. इसे देखकर गांव के लोगों को घटना का पता चला. इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत फोन करके दमकल विभाग को सूचना दी. सूचना मिलने के बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया. इस काम में गांव के लोगों ने भी दमकल कर्मियों की मदद की. करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. समय रहते आग बुझा दिए जाने से आसपास के खेतों में लगी करीब 12 एकड़ गन्ने की फसल को जलने से बचा लिया गया. अगर आग आगे फैल जाती, तो किसानों का नुकसान और ज्यादा हो सकता था.
इस आग से प्रभाकर विनायक प्रयाग, शिरीष प्रयाग और विकास पवार नाम के तीन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है. इन किसानों के खेतों में कुल करीब 10 एकड़ में गन्ने की फसल लगी हुई थी, जो आग की चपेट में आ गई. किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि गन्ने की फसल तैयार करने में कई महीने लगते हैं. इस दौरान खेत की देखभाल, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है. फसल जलने से किसानों की मेहनत के साथ उनकी लागत भी बर्बाद हो गई है.
पीड़ित किसान प्रभाकर प्रयाग ने बताया कि उनके खेत में चार एकड़ गन्ने की फसल जल गई है. यह फसल करीब नौ महीने की थी. उन्होंने पिछले नौ महीनों से फसल की देखभाल की थी और उसे तैयार करने के लिए काफी पैसा खर्च किया था. प्रभाकर प्रयाग के मुताबिक, गन्ने की बुवाई से लेकर खाद डालने और कीटनाशकों का छिड़काव करने तक करीब दो लाख रुपये खर्च हो चुके थे. उन्होंने बड़ी मेहनत से फसल को तैयार किया था, लेकिन आग लगने से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर गया. अब फसल जल जाने के बाद उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है.
प्रभाकर प्रयाग ने बताया कि इलाके में पहले से ही सूखे के कारण किसान परेशान हैं. खेतों में पर्याप्त पानी नहीं है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है. उन्होंने भी किसी तरह पानी का इंतजाम करके नौ महीने तक गन्ने की फसल को जिंदा रखा था. लेकिन अब शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग ने उनकी मेहनत को बर्बाद कर दिया. किसान के लिए यह दोहरी मार जैसी स्थिति है. एक तरफ पानी की कमी के कारण खेती करना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ आग लगने से तैयार होती फसल नष्ट हो गई. ऐसे में किसानों के सामने खेती पर खर्च किए गए पैसे की भरपाई करना बड़ी चुनौती बन गया है.
घटना के बाद पीड़ित किसान प्रभाकर प्रयाग ने प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की है. उनका कहना है कि जली हुई गन्ने की फसल का पंचनामा यानी नुकसान का सरकारी आकलन कराया जाए, ताकि उन्हें हुए नुकसान का सही हिसाब लगाया जा सके. उन्होंने मांग की है कि प्रशासन फसल के नुकसान की जांच कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दे. किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में काफी पैसा और समय लगाया था. ऐसे में फसल जल जाने से उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है. अब उन्हें प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के संबंध में प्रशासन की ओर से क्या फैसला लिया गया है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
लातूर के खोपेगांव में हुई यह घटना दिखाती है कि खेतों के आसपास बिजली की तारों और उपकरणों में खराबी होने से किसानों की फसल को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है. खासकर सूखी फसल में आग लगने पर उसे रोकना मुश्किल हो जाता है और आग तेजी से आसपास के खेतों तक फैल सकती है. इस घटना में दमकल विभाग और गांव वालों की मदद से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे 12 एकड़ अतिरिक्त फसल बच गई. लेकिन 10 एकड़ में खड़ी गन्ने की फसल जलने से प्रभावित किसानों को भारी नुकसान हुआ है. अब किसानों की मांग है कि नुकसान का आकलन करके उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे इस मुश्किल समय में कुछ राहत पा सकें.
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